इन देशों में है सबसे बड़े काले बाजार-आठवें पर भारत तो पहले पर कौन?

दुनियाभर में तस्करी, कालेधन, कबूतरबाजी, वन्य जीवों का शिकार, सट्टा और पाइरेसी जैसे धंधे खूब फल-फूल रहे हैं. सभी देशों की तमाम कोशिशों के बावजूद इस काले बाजार पर अंकुश नहीं लग रहा है. पर क्या आप जानते हैं कि दुनिया के किन देशों में सबसे ज्यादा कालाबाजारी होती है. आइए जानते हैं दुनिया के ऐसे टॉप 10 देशों के बारे में…

पहले तो ये जानना जरूरी है काला बाजार या भूमिगत बाजार या भूमिगत अर्थव्यवस्था वे बाजार हैं, जहां सभी बिजनेस बिना टैक्स, नियम और व्यापार सम्न्बन्धी नियंत्रण आदि की चिंता किये बिना चलते हैं. इन्हें आम तौर पर शैडो इकोनॉमी, ब्लैक इकोनॉमी और पैरलल इकोनॉमी भी कहते हैं.

10. रूस

इस लिस्ट में रूस का नंबर दसवां है. यहां पर 4,909 करोड़ डॉलर (3.19 लाख करोड़ रुपये) की कालाबाजारी होती है.

09. यूके

इसके बाद नौवें नंबर पर यूके (यूनाइटेड किंगडम) का नंबर आता है. यहां काला बाजार 6,196 करोड़ डॉलर (4.02 लाख करोड़ रुपये) है

08. भारत

आठवें नंबर पर भारत आता है. यहां कुल काला बाजार 6,859 करोड़ डॉलर (4.45 लाख करोड़ रुपये) है.

07. कनाडा

सातवां नंबर कनाडा का है. यहां कुल काला बाजार 7,783 करोड़ डॉलर (5.05 लाख करोड़ रुपये) है

06. जापान

इस लिस्ट में छठा नंबर जापान का हैं. यहां कुल काला बाजार 10830 करोड़ डॉलर (7.03 लाख करोड़ रुपये) है.

05. इटली

पांचवें नंबर पर इटली है. यहां कुल कालाबाजार 11,005 करोड़ डॉलर (7.15 लाख करोड़ रुपये) है.

04. स्पेन

इस लिस्ट में स्पेन चौथे नंबर पर है. यहां काला बाजार 12,406 करोड़ डॉलर (8.06 लाख करोड़ रुपये) है.

03. मेक्सिको

इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर मैक्सिको आता है. यहां कुल काला बाजार 12,608 करोड़ डॉलर (8.19 लाख करोड़ रुपये) है.

02. चीन

इस लिस्ट में दूसरा नंबर चीन का है. यहां कुल कालाबाजार 26,100 करोड़ डॉलर (16.96 लाख करोड़ रुपये) है.

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01. अमेरिका

दुनिया में सबसे ज्यादा काला बाजार अमेरिका है. यहां कुल काला बाजार 62,563 करोड़ डॉलर (40.66 लाख करोड़ रुपये) है.

1 लाख करोड़ में हुई दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स डील, वॉलमार्ट ने फ्लिफकार्ट को खरीदा

नई दिल्ली। दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स डील पर आखिरकार मुहर लग गई है। वॉलमार्ट ने देश की सबसे बड़ी ई-कामर्स कंपनी फ्लिफकार्ट को 1 लाख करोड़ में खऱीदा। आपको बता दें कि इस डील के बाद फ्लिफकॉर्ट की 70 फीसदी हिस्सेदारी वॉलमार्ट की हो जाएगी। अभी फिलहाल 30 अरब डॉलर के ई-कॉमर्स बाजार पर फ्लिपकार्ट और अमेजन का नियंत्रण है। जो इस डील के बाद बदल जाएगी। वॉलमार्ट और फ्लिफकॉर्ट के डील की पुष्टि सॉफ्टबैंक के सीईओ मासायोशी सन ने की है।

अमेजन ने भी की थी पेशकश
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस डील के मार्केट की दूसरी दिग्गज कंपनी अमेजन ने भी पेशकश की थी। ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन ने फ्लिपकार्ट में 60 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की पेशकश की थी, लेकिन कंपनी का निदेशक मंडल वालमार्ट की पेशकश के पक्ष में है। वहीं, इस बीच फ्लिपकार्ट के सह-संस्थापक सचिन बंसल के कंपनी से बाहर होने की खबरें आ रही है। रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि बंसल अपनी 5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर कंपनी छोड़ सकते हैं। हालांकि, अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

क्यों हुई ये डील
इस डील के जरिए वॉलमार्ट अमेरि‍का और दूसरे देशों में अमेजन को टक्‍कर देने का रास्‍ता ढूंढ रही है। ऑनलाइन सेल्‍स को बढ़ाने के लि‍ए वॉलमार्ट अमेरि‍का में हुए हालि‍या जेट.कॉम डील और चीन में जेडी.कॉम के साथ हुई डील से आगे नि‍कलना चाहती है। भारत में वॉलमार्ट को रेग्‍युलेशन के कारण मुश्‍कि‍लों का सामना करना पड़ रहा है और फ्लि‍पकार्ट में निवेश उसे ऑनलाइन रि‍टेल मार्केट में बड़ी जगह मिल जाएगी।

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मार्केट लीडर है फ्लिफकॉर्ट
बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच की रि‍पोर्ट में कहा गया है कि‍ 43 फीसदी से ज्‍यादा मार्केट शेयर के साथ फ्लि‍पकार्ट मार्केट लीडर है।जबकि अमेजन का मार्केट शेयर 37 फीसदी और स्‍नैपडील का मार्केट शेयर मात्र 9 फीसदी रह जाएगा। वॉलमार्ट दुनिया की सबसे बड़ी रिटेल चेन में से एक है। वहीं फ्लिपकार्ट देश की सबसे बड़ी ईकॉमर्स कंपनी में से एक हैं। जिसका भारत की मार्केट में 40 फीसदी का हिस्‍सा है। ऐसे में फ्लिपकार्ट का वॉलमार्ट में विलय हो जाता है तो वॉलमार्ट में देश में पहली ऐसी विदेशी कंपनी होगी जिसके स्‍टोर्स भारत में होंगे।

कुछ ऐसा है Flipkart का सफर: 11 साल में 10 हजार से 1 लाख करोड़ रुपये पर ऐसे पहुंची

देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट (Flipkart) बिक गई है. अमेरिकी कंपनी वालमार्ट ने इसमें 75 फीसदी हिस्सेदारी 1500 करोड़ डॉलर यानी एक लाख करोड़ रुपये में खरीदी है. हालांकि, सचिन बंसल और विनी बंसल ने कंपनी को इस मुकाम तक पहुंचाने में बहुत मेहनत की है. उन्होंने कंपनी को 11 साल पहले महज 10 हजार रुपये में शुरू किया था. आइए जानते हैं कंपनी के इस सफर के बारे में…

10 हजार में शुरू की थी कंपनी- इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली से पढ़ाने करने वाले सचिन और बिन्नी ने फ्लिपकार्ट की शुरुआत अक्टूबर 2007 में की थी. शुरू में इसका नाम फ्लिपकार्ट ऑनलाइन सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड था. इतना ही नहीं, ये सिर्फ बुक्स सेलिंग का काम करते थे. दोनों इस कंपनी को शुरू करने से पहले अमेजन डॉट कॉम के साथ काम कर चुके थे. सचिन और बिन्नी बताते हैं कि दोनों ने सिर्फ 10 हजार रुपए से अपनी कंपनी को शुरू किया था, जो आज 2000 करोड़ डॉलर यानी 1.32 लाख करोड़ रुपये की कंपनी हो गई है.

शुरू के 10 दिन कुछ नहीं बिका- सचिन और बिन्नी ने अपनी कंपनी की शुरुआत बेंगलुरु से की थी. दोनों ने 2-2 लाख रुपए मिलाकर एक अपार्टमेंट में 2 बैडरूम वाला फ्लैट किराए पर लिया और 2 कम्प्यूटर के साथ कंपनी शुरू की. हालांकि, कंपनी शुरू करने के 10 दिन तक कोई सेल नहीं हुई. इसके बाद, आंध्र प्रदेश के एक कस्टमर ने पहला ऑर्डर बुक किया. ये एक किताब थी जिसका नाम ‘Leaving Microsoft to Change the World’ और राइटर जॉन वुड थे. बीते सालों में फ्लिपकार्ट फर्श से अर्श पर पहुंच चुकी है और बेंगलुरु में कंपनी के कई ऑफिस हैं.

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सरनेम एक, लेकिन रिश्ता नहीं-सचिन बंसल और बिन्नी बंसल इन दोनों नाम को सुनकर ऐसा लगता है कि ये भाई होंगे, लेकिन ऐसा नहीं है. दोनों के सरनेम भले ही एक हैं, लेकिन दोनों सिर्फ बिजनेस पार्टनर हैं. इन दोनों में कुछ समानताएं और भी हैं, जैसे दोनों चंडीगढ़ के रहने वाले हैं और दोनों की स्कूलिंग सेंट ऐनी कॉन्वेंट स्कूल, चंडीगढ़ से हुई हैं. इतना ही नहीं, दोनों इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली से साथ पढ़े हैं. सचिन ने साल 2005 में IIT करने के बाद एक कंपनी टेकस्पेन ज्वाइन कर ली थी. जहां सिर्फ कुछ महीने ही काम किया. इसके बाद, उन्होंने अमेजन में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजिनियर के तौर पर काम किया. साल 2007 में दोनों ने अपनी कंपनी फ्लिपकार्ट को शुरू किया.

ई-कॉमर्स साइट फ्लिपकार्ट गैजेट्स के साथ इलेक्ट्रॉनिक, होम अप्लायंस, क्लॉथ, किचिन अप्लायंस, ऑटो एंड स्पोर्ट्स एक्सेसरीज, बुक्स एंड मीडिया, ज्वैलरी के साथ अन्य प्रोडक्ट भी सेल करती है. इस साइट की खास बात ये है कि ज्यादातर प्रोडक्ट्स पर बिग डिस्काउंट मिलता है. वहीं, यूजर्स के पास शॉपिंग के लिए कैश ऑन डिलिवरी, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग, ई-गिफ्ट बाउचर, कूपन कोड जैसे कई ऑप्शन मौजूद होते हैं.