मंगलवार और अमावस्या का खास योग, ये 5 उपाय बना सकते हैं धनवान

पौराणिक कथा

मौनी अमावस्या की पौराणिक कथा समुद्र मंथन के प्रसंग से जुड़ी है। पुराणों के अनुसार जब, असुरों और सुरों में अमृत कलश को लेकर युद्ध हो रहा था। तो उसी दौरान खींचतान के कारण अमृत कलश की कुछ बूंदें छलककर धरती पर गिर गईं। जिन स्थानों पर यह बूंद गिरी वहां अर्द्ध कुंभ और सिंहस्थ के आयोजन हुए। साथ ही इनमें से कुछ क्षेत्र गंगा – यमुना के संगम में थे। ऐसे में यह संगम बेहद पवित्र हो गया था। मौनी अमावस्या पर ,मौन व्रत करने का वैज्ञानिक कारण यह है कि, अमावस्या के दिन चंद्रमा के दर्शन नहीं होते हैं। चंद्रमा मन का कारक है। जब चंद्र दर्शन नहीं होते तो चंद्रमा का प्रभाव मन पर कुछ कम होता है। ऐसे में व्यक्ति की मन स्थिति कम हो जाती है। जिसके कारण उसे,मौनी अमावस्या पर,संयम रखकर ईश्वर का मनन करने और जप व ध्यान करने की सलाह दी जाती है जिससे उसमें सकारात्मकता का संचार होता है और वह शांत बना रहता है। मौन व्रत रखने से न तो उसका नुकसान होता है और न ही व्यर्थ किसी से विवाद होता है।

16 जनवरी को मौनी अमावस्या है। इस साल मंगलवार को पड़ने से ये अमावस्या और भी खास हो गई है। मंगलवार के संयोग के कारण इसे भौमवती अमावस्या भी कहा जाता है। जो कि धन लाभ और कार्य सिद्धि के लिए खास मानी गई है। मौनी अमावस्या पर स्नान, दान, श्राद्ध व व्रत का विशेष महत्व हमारे धर्म ग्रंथों में लिखा है। तंत्र शास्त्र में भी मौनी अमावस्या को विशेष तिथि माना गया है। मान्यता है कि इस दिन किए गए उपाय जल्दी ही शुभ फल प्रदान करते हैं। ये उपाय बहुत ही आसान हैं। जानिए मौनी अमावस्या के दिन आप कौन-कौन से उपाय कर सकते हैं-

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पहला उपाय –

अमावस्या की रात करीब 10 बजे नहाकर साफ पीले रंग के कपड़े पहन लें। इसके उत्तर दिशा की ओर मुख करके ऊन या कुश के आसन पर बैठ जाएं। अब अपने सामने पटिए (बाजोट या चौकी) पर एक थाली में केसर का स्वस्तिक या ऊं बनाकर उस पर महालक्ष्मी यंत्र स्थापित करें। इसके बाद उसके सामने एक दिव्य शंख थाली में स्थापित करें।
अब थोड़े से चावल को केसर में रंगकर दिव्य शंख में डालें। घी का दीपक जलाकर नीचे लिखे मंत्र का कमल गट्टे की माला से ग्यारह माला जाप करें-

मंत्र- सिद्धि बुद्धि प्रदे देवि भुक्ति मुक्ति प्रदायिनी।
मंत्र पुते सदा देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते।।

मंत्र जाप के बाद इस पूरी पूजन सामग्री को किसी नदी या तालाब में विसर्जित कर दें। इस प्रयोग से धन लाभ की संभावना बढ़ जाती है।

 

– अमावस्या की शाम घर के ईशान कोण में गाय के घी का दीपक लगाएं। बत्ती में रुई के स्थान पर लाल रंग के धागे का उपयोग करें। साथ ही दीएं में थोड़ी-सी केसर भी डाल दें। यह मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का उपाय है।

[जमीन के उत्तर-पूर्व कोने को ईशान कोण कहा जाता है। यह माना जाता है कि इस कोण पर देवताओं और आध्यात्मिक शक्ति का वास रहता है। इसलिए यह घर का सबसे पवित्र कोना होता है]

दूसरा उपाय

– अमावस्या पर किसी शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल व बिल्वपत्र चढ़ाएं। इसके बाद मंदिर में ही बैठकर रुद्राक्ष की माला से ऊं नमः शिवायः मंत्र का पाठ करें। ये उपाय करने से साधक की समस्त मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।

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साथ ही दीएं में थोड़ी-सी केसर भी डाल दें। यह मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का उपाय है।

तीसरा उपाय

– अमावस्या पर किसी शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल व बिल्वपत्र चढ़ाएं। इसके बाद मंदिर में ही बैठकर रुद्राक्ष की माला से ऊं नमः शिवायः मंत्र का पाठ करें। ये उपाय करने से साधक की समस्त मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।

चौथा उपाय

-अमावस्या पर भूखे प्राणियों को भोजन कराने का भी विशेष महत्व है। इस दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद आटे की गोलियां बनाएं। गोलियां बनाते समय भगवान का नाम लेते रहें। इसके बाद समीप स्थित किसी तालाब या नदी में जाकर यह आटे की गोलियां मछलियों को खिला दें। इस उपाय से आपके जीवन की परेशानियों का अंत हो सकता है।

अमावस्या पर चीटियों को शक्कर मिला हुआ आटा खिलाएं। ऐसा करने से आपके पाप कर्मों का प्रायश्चित होगा और अच्छे कामों के फल मिलना शुरू होंगे। इसी से आपकी मनोकामनाओं की पूर्ति होगी।

पाँचवा उपाय

-हिंदू धर्म में अमावस्या को पितरों की तिथि माना गया है। इसलिए इस दिन पितरों को प्रसन्न करने के लिए गाय के गोबर से बने उपले (कंडे) पर शुद्ध घी व गुड़ मिलाकर धूप (सुलगते हुए कंडे पर रखना) देनी चाहिए। यदि घी व गुड़ उपलब्ध न हो तो खीर से भी धूप दे सकते हैं।

यदि यह भी संभव न हो तो घर में जो भी ताजा भोजन बना हो, उससे भी धूप देने से पितर प्रसन्न हो जाते हैं। धूप देने के बाद हथेली में पानी लें व अंगूठे के माध्यम से उसे धरती पर छोड़ दें। ऐसा करने से पितरों को तृप्ति का अनुभव होता है और वे हमें आशीर्वाद देते हैं। जिससे हमारे जीवन में सुख-शांति आती है।

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