एक ऐसा मंदिर जहाँ लकवे से पीड़ित रोगी वापिस अपने पैरों से चलकर जाता है

[ads4]

भारत में राजस्थान की धरती पर अब तक कई चमत्कार हुए है जिनका पता आज तक वैज्ञानिक भी नही लगा पाए है, इनमे मुख्य रूप से मंदिरो का नाम सबसे पहले आता है क्योंकि राजस्थान में ज्यादातर चमत्कार मंदिरो में ही होते है लेकिन आज के आधुनिक जीवन के लोग इन मंदिरो के इस चमत्कार पर विश्वास नही रखते है और बीमारियो का इलाज कराने के लिए सिर्फ डॉक्टरों के पास ही जाते है |

लेकिन कई लोग आज भी ऐसे है जो मंदिरो में पूरा विश्वास रखते है ऐसे ही एक मंदिर के बारे में आपको बता रहे हैं जहाँ लकवे की बीमारी का इलाज किया जाता है ये मंदिर राजस्थान के नागोर में स्थित है. चतुर दास जी का ये मंदिर जहाँ लोगो का कहना है की इस मंदिर में लकवे से पीड़ित लोगो को राहत मिलती है और वो पूर्ण रूप से इस बीमारी से मुक्त हो जाते है ये मंदिर नागोर से 40 किलोमीटर दूर बुटाटी नामक एक गांव में स्थित है !

लोगो का कहना है की इस मंदिर में लकवे से पीड़ित कैसा भी व्यक्ति हो उसकी बीमारी का इलाज तुरंत होता है जब वो मंदिर से लौटता है तो उसे उसकी बीमारी से मुक्ति मिल जाती है आपको बता दे की यहाँ पर कई सारी पुरानी बिमारियों का इलाज होता है, इस मंदिर में कोई पण्डित या हकीम नही होता जो आप से पैसे लेता हो यहाँ तो ये सब चतुर महाराज के कमाल से होता है !

इस चमत्कार को देख कर ही लोग चौंक जाते है वो सोचते है की जिस बीमारी की इलाज डॉक्टर भी इतनी आसानी से नही कर सकते वो इस मंदिर में आने से ठीक हो जाती है आपको बता दे की यहाँ कोई दवाई नही दी जाती है यहाँ मरीज के परिजन पीड़ित से इस मंदिर की 7 परिकृमा लगवाते है और एक हवन करवाते है, कई मरीजो को मंदिर में कुछ दिनों के लिए रखा भी जाता है, इतना करने के बाद बीमारी अपने आप ठीक हो जाती है, ये इस जगह का ही चमत्कार है.

आपके शरीर अंग जो पहले बिलकुल हिलते डुलते नही थे वो काम करने लग जाते है और व्यक्ति एक दम ठीक हो जाता है आपने देखा होगा की लकवे से पीड़ित वो व्यक्ति जो बोल भी नही पाते है वो धीरे धीरे बोलने लगते है यहाँ ऐसे मरीज आते है जो डाक्टरो से इलाज कराने के बाद निराश हो गए थे और उनकी बीमारी ठीक नही हुई थी ऐसे मरीजो का यहाँ इलाज किया जाता है यहाँ पर मरीजो व् उसके परिजनों को रहने खाने की नि: शुल्क व्यवस्था होती है !

[ads3]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *