इस एक रेखा से तय होता है आदमी का भाग्य, इन उपायों से खुलती है किस्मत !

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किसी व्यक्ति का भाग्य कैसा रहेगा और वो कैसी जिंदगी जिएगा, इसका फैसला उसकी भाग्य रेखा देख कर होता है। भाग्य रेखा ही बताती है कि कोई आदमी अपने जीवन में कितनी सफलता हासिल करेगा, कैसा व्यापार या नौकरी करेगा और उसे कब-कब सफलता और असफलता मिलेगी।

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इन जगहों से शुरु होती है भाग्य रेखा

भाग्य रेखा कलाई से आरंभ होकर मध्यमा अंगुली के नीचे स्थित शनि पर्वत तक पहुंचती है। इसके अलावा भी भाग्य रेखा कई अन्य स्थानों से आरंभ हो सकती है लेकिन खत्म शनि पर्वत पर ही होती है। आम तौर पर यह रेखा मणिबंध, शुक्र पर्वत, जीवन रेखा, चंद्र पर्वत या ह्रदय रेखा से शुरु हो सकती है। इस रेखा के उदगम स्थान से पता लगता है कि उस व्यक्ति का भाग्य कैसा रहेगा।

 

(1) यदि भाग्य रेखा मणिबंध से आरंभ होकर बिना कटे-फटे या टूटे सीधी शनि पर्वत तक जाती है तो ऐसा व्यक्ति राजा समान जीवन व्यतीत करता है। परन्तु इस रेखा को बीच में कोई अन्य रेखा काट दें तो जीवन के उस हिस्से में व्यक्ति को दुर्भाग्य का सामना करना पड़ता है।

(2) शनि पर्वत पर पहुंच कर भाग्य रेखा दो रेखाओं में बंट जाए और एक हिस्सा गुरु पर्वत पर पहुंच जाए तो ऐस व्यक्ति उच्च पद तथा प्रतिष्ठा प्राप्त करता है, वह समाज में सम्मान पाता है और स्वभाव से परोपकारी तथा दानी होता है।

(3) हथेली के मध्य में मस्तिष्क रेखा से निकलकर कोई रेखा शनि पर्वत तक पहुंचती हो तो ऐसा व्यक्ति सामान्य परिवार में जन्म लेकर भी अपनी योग्यता तथा लगन से सफलता के उच्च शिखर को छूता है।

(4) शुक्र पर्वत से निकलने वाली रेखा व्यक्ति को कलाकार बनाती है। ऐसे लोगों को भाग्योदय कला के माध्यम से ही होता है।

(5) भाग्य रेखा अगर शनि पर्वत को पार कर मध्यमा अंगुली के किसी पोर तक चढ़ जाएं तो ऐसा व्यक्ति अपनी योग्यता तथा लाख प्रयासों के बाद भी जीवन में असफल ही रहता है।

(6) हथेली में अच्छी भाग्य रेखा के साथ-साथ शनि उत्तम हो तथा जीवन रेखा घुमावदार हो तो ऐसे व्यक्ति के पास कभी धन-समृद्धि की कोई कमी नहीं होती।

(7) भाग्य रेखा जितनी गहरी तथा लंबी होती है, उतना ही भाग्य अच्छा होता है। लेकिन रेखा फीकी या कटी हुई हो तो इसे अच्छा नहीं माना गया है।

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