भगवान् शिव के भूतगणों ने किया आदि केशव मंदिर का निर्माण

आदि Kesava मंदिर (Ramanujar मंदिर कहा जाता है) तमिलनाडु के दक्षिण भारतीय राज्य में कांचीपुरम जिले श्रीपेरंबुदूर में स्थित जो हिंदू देवता विष्णु जी को  समर्पित है। वास्तुकला की द्रविड़ शैली में निर्मित, विष्णु, जो AdiKesava और उनकी पत्नी Amirtagadavalli के रूप में लक्ष्मी के रूप में पूजा जाता है । ऐसा विश्वास है की यही मंदिर रामानुज जी के जन्मस्थान के प्रतिपादक है।

रामानुज की गोद में selvapillai

आप ये नहीं जानते होंगे की व्याख्यात संत श्रीरामानुजाचार्य की जन्म स्थान श्री पेरंबदूर को ‘भूतपुरी’ भी कहते है क्योंकि देविक काल के समय में इस स्थान पर शिवजी के भूतगणों ने तपस्या की थी। तपस्या के साथ भूतगणों ने यहाँ पर ‘आदि केशव पेरुमल मंदिर’ का निर्माण भी किया था। इन्होने यहाँ तपस्या इसलिए की क्योकि …
इस सृष्टि के प्रारम्भ में एक बार जब भगवान शंकर तांडव नृत्य कर रहे थे। तभी उनका नृत्य को भूतगण देखकर हंस पड़े। इसी कारण से भगवान शंकर नाराज़ हो गए और भूतगणों को अपने से अलग होने का श्राप दे दिया। भूतगण इससे दुखी होकर सभी ब्रह्माजी के पास गए।

और ब्रह्मा जी ने उन सभी भूतगणों को वेंक्टेश्वर गिरि के दक्षिण सत्यव्रत तीर्थ में केशवनारायण की तपस्या करने के लिए कहा। एवं सभी काफी सालो तक वही पर तप करते रहे। तब जाकर भगवान केशव ने उन्हें दर्शन दिए।

भूतगण की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान केशवनारायण ने एक सरोवर का निर्माण किया जो आज अनंतसर के नाम से प्रसिद्ध हुआ। और भगवान केशवनारायण के कहने पर सभी भूतगण इस सरोवर में स्नान किया जिससे ये सभी भगवान् शंकर के श्राप से मुक्त हो गए एवं  उन्हें पुनः भगवान शिव का सानिध्धय प्राप्त हो गया।
इसी कारण भूतगण अपनी ख़ुशी भगवान् विष्णु के समक्ष जाहिर करने के लिए आदि केशव पेरुमल मंदिर निर्माण किया। जबकि यहां तपस्या भूतगणों ने की थी इस कारण इस स्थान का नाम भूतपुरी हो गया जो आज प्रसिद्ध है।

आदि केशव पेरुमल मंदिर में शेषशायी भगवान नारायण की श्रीमूर्ति है। इस मूर्ति के पास माँ लक्ष्मी जी का मंदिर है। जिसमें लक्ष्मी जी की मनोहर मूर्ति है। इनके समीप ही रामचंद्र जी का भी मंदिर है। मंदिर के घेरे के बाहर अनंतसर नामक एक सरोवर भी है। जिसके नजदीक रामानुजस्वामी का एक मंदिर है।

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