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मालकांगनी को चरक संहिता में शिरोविरेचनार्थ एवं उन्माद व् अपस्मार की चिक्तिसा में प्रयोग बताया है. सुश्रुत संहिता में ज्योतिषमिति तेल को शिरोविरेचनार्थ उन्माद व् अपस्मार के साथ में कुष्ठ की चिकित्सा में प्रयोग बताया है.

मालकांगनी अर्थात ज्योतिषमिति का प्रयोग दिमाग को राकेट जैसा तेज़ करने, कमजोरी दूर करने, ताक़त बढाने, पुरुष रोगों में, कुष्ठ रोगों में, मिर्गी जैसे कड़े रोगों में किया जाता है.

मालकांगनी के फूल पीले और हरे रंग के होते हैं। और स्वाद कड़वा और तीखा होता है। मालकांगनी गर्म प्रकृति की होती है। इसके बीजों का अधिक मात्रा में सेवन करने से उल्टी या दस्त का रोग हो सकता है। मालकांगनी का सेवन गर्म स्वभाव वाले व्यक्तियों के लिए हानिकारक हो सकता है।

विभिन्न भाषाओँ में मालकांगनी के नाम
बोटैनिकल नाम – Celastrus paniculatus
संस्कृत नाम – ज्योतिषमिति
हिंदी – मालकांगनी
मालकांगनी की सेवन मात्रा – Malkangani ki matra
मात्रा : मालकांगनी के बीजों का 1 से 2 ग्राम चूर्ण और रस 5 से 15 बूंद तक ले सकते हैं।

मालकांगनी के गुण : Malkangani ke fayde.
मालकांगनी पक्षाघात, संधिवात (गठिया), वात रोग, बेरी-बेरी, कास (खांसी), श्वास (दमा), मूत्र रोग, अपच, खुजली, बवासीर (अर्श), नपुंसकता, दाद, जख्म (व्रण), सफेद दाग, शोथ (सूजन), याददाश्त की कमी में गुणकारी है। मालकांगनी अफीम खाने की आदत छुड़ाने की एक उत्तम औषधि है।

यूनानी चिकित्सा पद्धति के मतानुसार मालकांगनी तीसरे दर्जे की गर्म और रूक्ष होती है। मालकांगनी का तेल पसली का दर्द, लकवा (पक्षाघात), जोड़ों का दर्द (गठिया), स्नायु (नर्वस सिस्टम) के रोग में लाभप्रद होता है। मालकांगनी याददाश्त को तेज करता है।

विभिन्न रोगों में मालकांगनी के उपयोग :
सफेद दाग में मालकांगनी – Safed Dag ka ilaj malkangni se
मालकांगनी और बावची के तेल को बराबर मात्रा में मिलाकर एक शीशी में रख लें, इसको सफेद दागों पर रोजाना सुबह-शाम लगाने से लाभ मिलता है।
दाद का इलाज मालकांगनी से – daad ka ilaj malkangani se
मालकांगनी को कालीमिर्च के बारीक चूर्ण के साथ पीसकर दाद पर मालिश करने से कुछ ही दिनों में दाद ठीक हो जाता है।
एक्जिमा: Eczema ka ilaj malkangni se
ज्योतिष्मती (मालकांगनी) के पत्तों को कालीमिर्च के साथ पीसकर लेप करने से एक्जिमा समाप्त हो जाता है।
खुजली का इलाज मालकांगनी से – Khujli ka ilaj malkangni se
मालकांगनी के बीजों को गोमूत्र में पीसकर खुजली वाले अंग पर नियमित लगाने से खुजली में लाभ मिलता है।
खूनी बवासीर में मालकांगनी का प्रयोग – bawasir ka ilaj malkangani se
इसके बीजों को गोमूत्र (गाय के पेशाब) में पीसकर खुजली वाले अंग पर नियमित लगाने से खूनी बवासीर में आराम मिलता है।
दमा – श्वास:
मालकांगनी के बीज और छोटी इलायची को बराबर मात्रा में पीसकर आधा चम्मच की मात्रा में शहद के साथ सुबह-शाम खाने से दमा के रोग में आराम मिलता है। परंतु इस रोग मे अधिक सावधानी की जरूरत है इसलिए आयुर्वेद से अनभिज्ञ को दमे मे इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए

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बुद्धि और स्मृति बढ़ना:
मालकांगनी के बीज, बच, देवदारू और अतीस आदि का मिश्रण बना लें। रोज सुबह-शाम 1 चम्मच घी के साथ पीने से दिमाग तेज और फूर्तीला बनता है। मालकांगनी तेल की 5-10 बूंद मक्खन के साथ सेवन करने से भी लाभ मिलता है।
दिमाग के कीड़े: dimag me keede pad jane ka ilaj
पहले दिन मालकांगनी का 1 बीज, दूसरे दिन 2 बीज और तीसरे दिन 3 बीज इसी तरह से 21 दिन तक बीज बढ़ायें और फिर इसी तरह घटाते हुए एक बीज तक ले आएं। इसके बीजों को निगलकर ऊपर से दूध पीने से दिमाग की कमजोरी नष्ट हो जाती है।
लगभग 3 ग्राम मालकांगनी के चूर्ण को सुबह और शाम दूध के साथ खाने से स्मरण शक्ति (याददाश्त) बढ़ती है।
सिर में दर्द:
मालकांगनी का तेल और बादाम के तेल को 2-2 बूंद की मात्रा में सुबह खाली पेट एक बताशे में डालकर खा लें और ऊपर से 1 कप दूध पियें। मालकांगनी का लगातार सेवन करने से पुराने सिर का दर्द और आधासीसी (माइग्रेन) के दर्द में आराम मिलता है।
मिर्गी (अपस्मार):
मालकांगनी के तेल में कस्तूरी को मिलाकर रोगी को चटाने से मिर्गी का दौरा आना बंद हो जाता है।
अनिद्रा (नींद का कम आना):
मालकांगनी के बीज, सर्पगन्धा, जटामांसी और मिश्री को बराबर मात्रा में मिलाकर पीस लें। इसे 1 चम्मच की मात्रा में शहद के साथ खाने से अनिद्रा रोग (नींद का कम आना) में राहत मिलती है।
नेत्र ज्योतिवर्द्धक:
मालकांगनी के तेल की मालिश पैर के तलुवों पर रोजाना करते रहने से आंखों की रोशनी बढ़ जाती है।
जीभ और त्वचा की सुन्नता:
मालकांगनी (ज्योतिष्मती) के बीज पहले दिन 1 बीज तथा दूसरे रोज से 1-1 बीज बढ़ाते हुए 50 वें दिन में 50 बीज खायें तथा 50 वें दिन से 1-1 बीज कम करते हुए 1 बीज की मात्रा तक खायें। इसके प्रयोग से मूत्र की मात्रा बढ़ जाती है लेकिन इससे किसी भी प्रकार की हानि नहीं होती है तथा जीभ और त्वचा की सुन्नता ठीक होती है।
शरीर का सुन्न पड़ जाना:
10 से 15 बूंद मालकांगनी के तेल का सेवन करने से शरीर की सुन्नता दूर हो जाती है।
उरूस्तम्भ (जांघ का सुन्न होना):
10-15 मालकांगनी के तेल की बूंद के सेवन से शरीर की सुन्नता दूर हो जाती है और यह हड्डियों में पीव को खत्म करता है।
नपुंसकता का इलाज – मालकांगनी
मालकांगनी के तेल की 10 बूंदे नागबेल के पान पर लगाकर खाने से नपुंसकता दूर हो जाती है। इसके सेवन के साथ दूध और घी का प्रयोग ज्यादा करें।
मालकांगनी के तेल को पान के पत्ते में लगाकर रात में शिश्न (लिंग) पर लपेटकर सो जाएं और 2 ग्राम बीजों को दूध की खीर के साथ सुबह-शाम सेवन करें। इससे नपुंसकता के रोग में लाभ मिलता है।
50 ग्राम मालकांगनी के दाने और 25 ग्राम शक्कर को आधा किलो गाय के दूध में डालकर आग पर चढ़ा दें। जब दूध का खोया बन जाये तब इसे उतारकर मोटी-मोटी गोली बनाकर रख लें और रोज 1-1 गोली सुबह-शाम गाय के दूध के साथ खाये। इससे नपुंसकता दूर होती है।
मालकांगनी के बीजों को खीर में मिलाकर खाने से नपुंसकता मिट जाती है।

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पुरुष गुप्तांग की वृद्धि:
भुने सुहागे को पीसकर मालकांगनी के तेल में मिलाकर गुप्तांग पर सुबह-शाम मालिश करने से लिंग में सख्तपन और मोटापन बढ़ता है।
वीर्य रोग और टी बी – मालकांगनी
40 ग्राम मालकांगनी का तेल, 80 ग्राम घी तथा 120 ग्राम शहद को मिलाकर कांच के बर्तन में रख दें। सुबह-शाम 6 ग्राम दवा खाने से नपुंसकता और टी.बी. के रोग में लाभ मिलता है।
कमजोरी का इलाज- मालकांगनी
मालकांगनी के बीजों को दबाकर निकाला हुआ तेल, 2 से 10 बूंद को मक्खन या दूध में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से दिमाग तेज होता है और कमजोरी मिट जाती है।
मालकांगनी के बीज को गाय के घी में भून लें। फिर इसमें इसी के समान मात्रा में मिश्री मिलाकर सुबह-शाम एक कप दूध के साथ सेवन करें। इससे शरीर की कमजोरी दूर हो जाती है।
शरीर का ताकतवर और शक्तिशाली बनाना: – मालकांगनी
लगभग 250 ग्राम मालकांगनी को गाय के घी में भूनकर, इसमें 250 ग्राम शक्कर मिलाकर चूर्ण बना लें। अब इस चूर्ण को लगभग 6 ग्राम की मात्रा में गाय के दूध के साथ सुबह-शाम खाने से मनुष्य के शरीर में ताकत का विकास होता है। इसका सेवन लगभग 40 दिनों तक करना चाहिए।
जो भी अपना वजन बढ़ाने के या जिम मे जाकर अपनी सेहत बनाने के इच्छुक हैं वह इसका प्रयोग जरूर करे- इसके साथ साथ अश्वगंधा, शतावरी आदि का प्रयोग इसके साथ करे- कोई भी स्टीरायड या सप्लीमेंट्स इसके बराबर स्टेमिना नहीं बढ़ाता- जो खिलाड़ी है या जिम मे जाते हैं वह इसके साथ शतावरी या अश्वगंधा का प्रयोग जरूर करे
थकावट महसूस नहीं होगी – मालकांगनी
जो बहुत जल्दी थक जाते है जिसे लगता है आधा दिन काम करने के बाद ही सारा शरीर दर्द कर रहा है जो बार बार चाय पीकर थकावट को दूर करने की कोशिश करते हैं उनके लिए यह आयुर्वेद की संजीवनी बूटी है बस 10 दिन प्रयोग करने के बाद शरीर मे थकावट महसूस नहीं होगी.
पाचन शक्ति व भूख बढ़ाये – मालकांगनी
यह पाचन शक्ति व भूख को बढ़ाती है जो व्यक्ति इसका प्रयोग करे वह भोजन समय पर करे तथा चाय पीकर अपनी भूख को नष्ट ना करे नहीं तो यह लाभ के स्थान पर हानि करती है- इसके प्रयोग करने वाले को दूध घी का प्रयोग अधिक करना चाहिए-
सर्दी में विशेष टॉनिक – मालकांगनी
जो व्यक्ति सर्दी मे प्रतिदिन सुबह घर से निकलते है वह इसका प्रयोग जरूर करे- जिसे सर्दी अधिक सताती है वह भी इसका जादू जरूर देखे- यह शरीर मे सर्दी सहन करने की क्षमता को बहुत अधिक बढ़ा देती है-
सर्दी खांसी नज़ले का इलाज – मालकांगनी
नजले जुकाम, बार बार होने वाले जुकाम, मौसम बदलते ही होने वाले जुखाम, सारी सर्दी बने रहने वाले जुकाम मे चमत्कार दिखाती है जो भी नजले या जुखाम से परेशान है वह इसका प्रयोग जरूर करे- कुछ दिन प्रयोग करने से एक साल तक समस्या से मुक्ति पा लेंगे- बहुत से व्यक्ति जिन्हे बड़े अस्पतालो के ENT के विशेषज्ञो ने कह दिया था कि सारी उम्र दवाई खानी होगी उन्हे इससे कुछ ही दिन मे मुसीबत से मुक्ति मिल गई
मासिक-धर्म अवरोध: मालकांगनी
मालकांगनी के पत्ते तथा विजयसार की लकड़ी दोनों को दूध में पीस-छानकर पीने से बंद हुआ मासिक-धर्म दुबारा शुरू हो जाता है।
मालकांगनी के पत्तों को पीसकर तथा घी में भूनकर महिलाओं को खिलाना चाहिए। इससे महिलाओं का बंद हुआ मासिक-धर्म दुबारा शुरू हो जाता है।
मालकांगनी के पत्ते, विजयसार, सज्जीक्षार, बच को ठंडे दूध में पीसकर स्त्री को पिलाने से मासिकस्राव (रजोदर्शन) आने लगता है।
बंद माहवारी – मालकांगनीमालकांगनी के बीज 3 ग्राम की मात्रा में लेकर गर्म दूध के साथ सेवन करने से अधिक दिनों का रुका हुआ मासिक-धर्म भी जारी हो जाता है।

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गठिया रोग: – मालकांगनी
20 ग्राम मालकांगनी के बीज और 10 ग्राम अजवायन को पीस-छानकर चूर्ण बनाकर रोजाना 1 ग्राम चूर्ण सुबह-शाम खाने से गठिया रोग (घुटनों का दर्द) में आराम होता है।
10-10 ग्राम मालकांगनी, काला जीरा, अजवाइन, मेथी और तिल को लेकर पीस लें फिर इसे तेल में पकाकर छानकर रख लें। इस तेल से कुछ दिनों तक मालिश करें। इससे गठिया रोग (घुटनों का दर्द) ठीक हो जाता है।
चालविभ्रम (कलाया खन्ज) :
ज्योतिष्मती (मालकांगनी) के बीजों के काढ़े में 2 से 4 लौंग डालकर सेवन करना चाहिए। इसका 40 मिलीलीटर काढ़ा सुबह-शाम सेवन करने से चालविभ्रम रोग में लाभ पहुंचता है।
नाखूनों का अन्दर की ओर बढ़ना:
ज्योतिष्मती के बीजों को अच्छी तरह से पीसकर उसका लेप नाखून पर लगाने से नाखून की जलन व दर्द में राहत मिलती है।
नाखूनों का जख्म:
ज्योतिष्मती (मालकांगनी) के बीजों को पीसकर नाखून पर लेप करने से नाखूनों का जख्म ठीक होता है।
अफीम की आदत छुड़ाने के लिए: – Afeem Chhudane ka tarika
मालकांगनी के पत्तों का रस एक चम्मच की मात्रा में 2 चम्मच पानी के साथ दिन में 3 बार रोगी को पिलाते रहने से अफीम की गन्दी आदत से छुटकारा पाया जा सकता है।
गोली लगने पर
गोली लगे घाव को रोजाना मालकांगनी (ज्योतिष्मती) के बीजों को पीसकर लेप करने से घाव बहुत जल्दी ही भर जाता है।
बेरी-बेरी का इलाज – Beri beri ka ilaj
1 बताशे में मालकांगनी के बीजों को पानी में पीसकर बनी लुगदी (पेस्ट) को मस्सों पर लगाते रहने से खून का बहाव कम होता है।
शुरुआती बेरी-बेरी रोग में ज्योतिष्मती (मालकांगनी) तेल की 10 से 15 बूंद, दूध या मलाई के साथ मिलाकर सुबह-शाम पीने से यह रोग दूर हो जाता है।
ज्योतिष्मती (माल कांगनी) के बीजों को सोंठ के साथ खाने से लाभ होता है। शुरुआत में 1 बीज और इसके बाद रोजाना 1-1 बीज की संख्या बढ़ाते हुए 50 बीज तक, सोंठ के साथ 50 दिन तक खायें। इसके बाद 50 वें दिन से प्रत्येक दिन इसके बीजों की 1-1 संख्या कम करते हुए 1 बीज तक, सोंठ के साथ खायें। ज्योतिष्मती (मालकांगनी) को खाने से पहले पेशाब की मात्रा बढ़ती है फिर धीरे-धीरे यह सूजन कम करती है। धीरे-धीरे संवेदनशीलता वापस आ जाती और शरीर की नसे स्वस्थ्य हो जाती हैं।
ध्यान रहे : ज्योतिष्मती तेल या ज्योतिष्मती बीज में से किसी एक का ही प्रयोग करें।
विशेष – मालकांगनी गर्म प्रकृति की होने के कारण इसके सेवन काल में घी और दूध का भरपूर इस्तेमाल करना चाहिए.

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