104 साल बाद, 21वीं सदी का सबसे लंबा पूर्ण चंद्रग्रहण 27 जुलाई को-राशियों पर रहेगा खास असर…क्या करें क्या न करें

21वीं सदी का सबसे लंबा खग्रास चंद्रग्रहण जुलाई में होने वाला है। यह एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है। इसकी महत्ता को ऐसे भी समझा जा सकता है कि इसके आगे-पीछे 13 जुलाई और 11 अगस्त 2018 को दो खंडग्रास सूर्यग्रहण पड़ेंगे।

इस साल 27 जुलाई 2018 को 21 वीं सदी का सबसे लंबा और पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा। चंद्र ग्रहण के शुरू होने से समाप्त होने तक का समय करीब 4 घंटे का होगा। यह संयोग 104 साल के बाद बन रहा है। ग्रहण 27 जुलाई की मध्य रात्रि में 11 बजकर 55 मिनट पर होगा और इसका मोक्ष काल यानी अंत 28 जुलाई की सुबह 3 बजकर 39 मिनट पर होगा। इस चन्द्र ग्रहण में सुपर ब्लड ब्लू मून का नजारा भी दिखेगा। चंद्र ग्रहण के समय चांद ज्यादा चमकीला और बड़ा नजर आएगा। भारत के अलावा यह चंद्रग्रहण म्यांमार, भूटान, पाकिस्तान, अफगानिस्तान चीन, नेपाल, अंटाकर्टिका, ऑस्ट्रेलिया, एशिया, अफ्रीका, यूरोप, दक्षिण अमेरिका के मध्य और पूर्वी भाग में दिखाई देगा।

चंद्रग्रहण  के समय न करें ये काम  : –
– चंद्र ग्रहण के समय कुछ भी खाना या पीना नहीं चाहिए।
– चंद्र ग्रहण के दौरान किसी को भी सिर में धोना, तेल लगाना, पानी पीना, मल- मूत्र त्याग, बालों में कंघी, ब्रश आदि कार्य नहीं करना चाहिए. संभव हो तो ग्रहण खत्म होने के बाद नहाना चाहिए।
– ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए।
– इस काल में पूजा पाठ करना शुभ होता है, इस दौरान मंत्रों का जाप करें. इस प्रकार नकारात्मक ऊर्जा से छुटकारा मिलता है।
– महिलाओं को ग्रहण के दौरान चाकू, कैंची, सूई-धागे का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

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आपको बता दे कि चंद्रग्रहण के कारण कुछ राशियों पर विशेष प्रभाव पड़ेगा जिसमें मेष, सिंह, वृश्चिक और मीन राशि के जातकों के लिए चंद्रग्रहण दर्शन लाभ, शुभ और सुखद फलदायक रहेगा।

वहीं मिथुन, तुला, मकर, कुंभ राशि के जातकों के लिए चंद्रग्रहण का दर्शन अशुभ होगा। उन्हें चंद्रग्रहण का दर्शन नहीं करना चाहिए। वृषभ, कर्क, कन्या व धनु राशि के जातकों के लिए मिला-जुला फलदायक रहेगा।

चंद्रग्रहण पर लोगों को सोने, चांदी व तांबे के नाग का काले तिल तांबे की प्लेट में रखकर दान करना शुभ माना जाता है।

क्या रहेगा राशियों पर असर

104 साल बाद 27 जुलाई को दुलर्भ चंद्रग्रहण लगने जा रहा है, जिसका चार राशियों पर खास असर रहेगा और इस दिन कुछ खास बातों का ध्यान रखना होगा। ज्योतिषियों का कहना है कि यह चंद्रग्रहण बेहद खास है। ऐसे में लोगों को बेहद सावधानी बरतनी होगी।

शनि मंदिर के शास्त्री पंडित उदयवीर ने बताया कि आषाढ़ पूर्णिमा पर 27 जुलाई की रात खग्रास चंद्रग्रहण होगा। 27 व 28 जुलाई को 3 घंटे 55 मिनट का खग्रास चंद्रग्रहण होगा। पूरे देश के साथ-साथ यमुनानगर और आसपास के क्षेत्र में भी इसे देखा जा सकेगा। 104 साल बाद ये संयोग बन रहा है।

इस ग्रहण का प्रभाव चार राशियों मेष, सिंह, वृश्चिक व मीन के लिए श्रेष्ठ है। वहीं मिथुन, तुला, मकर और कुंभ के लिए यह चंद्रग्रहण नेष्ट है। इन राशि वाले लोग ग्रहण के दौरान भगवान शिव और हनुमान की आराधना कर ग्रहण के प्रभाव को अनुकूल बना सकते हैं।

खग्रास चंद्रग्रहण का ग्रह गोचर के अनुसार अलग-अलग प्रभाव होगा। ग्रह गोचर में मकर राशि के केतु के साथ चंद्रमा का प्रभाव और राहु से उसका समसप्तक दृष्टि संबंध होना, युति कृत मान से कर्क राशि में राहु, सूर्य, बुध तथा मकर राशि में चंद्र, केतु, मंगल युति कृत दृष्टि संबंध होना, दो तरफा केंद्र योग का बनना और शनि व मंगल का वक्री होना अपने आप में विशेष घटना है। हालांकि यह अच्छा नहीं माना जाता है।

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चंद्रग्रहण कब से कब तक

सूतक-आषाढ़ पूर्णिमा ग्रहण प्रारंभ होने के तीन प्रहर यानी 9 घंटा पहले शुरू होगा। मोक्ष तड़के 3.55 बजे होगा। ग्रहण स्पर्श रात 11:45 बजे। ग्रहण सम्मिलन रात 1 बजे। उन्मूलन रात 2:45 बजे होगा।

क्या करें और क्या न करें

सूर्यग्रहण में ग्रहण के 4 पहर पूर्व और चंद्र ग्रहण में 3 पहर पूर्व भोजन नहीं करना चाहिए। बुजुर्ग, बालक और रोगी डेढ़ प्रहर पूर्व तक खा सकते हैं। जिन पदार्थों में कुश या तुलसी की पत्तियां डाल दी जाती हैं, वे पदार्थ दूषित नहीं होते। ग्रहण वेद के प्रारंभ में तिल या कुश मिश्रित जल का उपयोग नहीं करना चाहिए। ग्रहण शुरू होने से अंत तक अन्न या जल नहीं लेना चाहिए।

104 साल बाद 27 जुलाई को दुलर्भ चंद्रग्रहण लगने जा रहा है, जिसका चार राशियों पर खास असर रहेगा और इस दिन कुछ खास बातों का ध्यान रखना होगा। ज्योतिषियों का कहना है कि यह चंद्रग्रहण बेहद खास है। ऐसे में लोगों को बेहद सावधानी बरतनी होगी।

आषाढ़ पूर्णिमा पर 27 जुलाई की रात खग्रास चंद्रग्रहण होगा। 27 व 28 जुलाई को 3 घंटे 55 मिनट का खग्रास चंद्रग्रहण होगा। पूरे देश के साथ-साथ यमुनानगर और आसपास के क्षेत्र में भी इसे देखा जा सकेगा। 104 साल बाद ये संयोग बन रहा है।

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