लाखों लोगों को शुद्ध पानी दे सकते हैं सहजन के बीज : शोध – सहजन के बीज

सहजन के बीज – .. मुनगा और ड्रमस्टिक नाम से पहचाने जाने वाले पेड़ का एक अन्य इस्तेमाल वैज्ञानिकों ने ढूंढ़ निकाला है। एक नए शोध में पता चला है कि सहजन के बीज पानी को शुद्ध करने में सहायक हो सकते हैं और विकासशील देशों में बेहद कम कीमत में लाखों लोगों को शुद्ध जल मुहैया करा सकते हैं। ( सहजन के बीज , sahjan ke beej, sahjan ke fayde, sahjan ke beej ke fayde )
सहजन का उपयोग सब्जी और प्राकृतिक तेलों के लिए किया जाता है और उसके बीजों का इस्तेमाल पानी शुद्ध करने के देशी तरीके के तौर पर किया जाता है। हालांकि यह विधि ज्यादा कारगर नहीं है।

( सहजन के बीज , sahjan ke beej, sahjan ke fayde )

अमेरिका के कारनेगी मेलेन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने रेत और सहजन से जल शोधन के लिए सस्ता और प्रभावी पानी निस्पंदन माध्यम तैयार किया है। इसका नाम उन्होंने ‘एफ-सैंड’ रखा।

[ ये भी पढ़िए सफ़ेद दाग का इलाज Safed daag ka ilaj ]

शोधकर्ताओं ने सहजन से सीड प्रोटीन अलग किए और रेत के मुख्य घटक सिलिका पार्टिकल्स के साथ मिलाकर एफ-सैंड पर रखा।
शोधकर्ताओं ने पाया कि इसने पानी में मौजूद सूक्ष्मजीवों को नष्ट कर दिया, साथ ही अशुद्धियों को कम किया। इस अशुद्धियों को भी बाद में दूर किया गया और इस बेहद सरल तरीके से शुद्ध पानी उपलब्ध था। ( सहजन के बीज , sahjan ke beej, sahjan ke fayde, sahjan ke beej ke fayde )

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 2.1 अरब लोगों को शुद्ध पेयजल नहीं मिलता। इनमें से अधिकतर लोग विकासशील देशों में रहते हैं।

READ  बार बार होने वाले मुहं के छालों का देसी इलाज

सहजन के फायदे,  sahjan ke fayde

सहजन के पौष्टिक गुणों की तुलना

?-विटामिन सी- संतरे से सात गुना
?-विटामिन ए- गाजर से चार गुना
?-कैलशियम- दूध से चार गुना
?-पोटेशियम- केले से तीन गुना
? प्रोटीन- दही की तुलना में तीन गुना

स्वास्थ्य के हिसाब से इसकी फली, हरी और सूखी पत्तियों में कार्बोहाइड्रेट , प्रोटीन , कैल्शियम , पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम,विटामिन-ए , सी और बी-काम्प्लेक्स प्रचुर मात्रा में पाई जाती है

इनका सेवन कर कई बीमारियों को बढ़ने से रोका जा सकता है, इसका बॉटेनिकल नाम ‘ मोरिगा ओलिफेरा ‘ है हिंदी में इसे सहजना , सुजना , सेंजन और मुनगा नाम से भी जानते हैं.जो लोग इसके बारे में जानते हैं , वे इसका सेवन जरूर करते हैं, सहजन में दूध की तुलना में चार गुना कैल्शियम और दोगुना प्रोटीन पाया जाता है.

[ ये भी पढ़िए bawasir ka ilaj बवासीर का इलाज ]

ये हैं सहजन के औषधीय गुण सहजन का फूल पेट और कफ रोगों में , इसकी फली वात व उदरशूल में , पत्ती नेत्ररोग , मोच , साइटिका , गठिया आदि में उपयोगी है

इसकी छाल का सेवन साइटिका , गठिया , लीवर में लाभकारी होता है। सहजन के छाल में शहद मिलाकर पीने से वात और कफ रोग खत्म हो जाते हैं ( सहजन के बीज , sahjan ke beej, sahjan ke fayde, sahjan ke beej ke fayde )

इसकी पत्ती का काढ़ा बनाकर पीने से गठिया , साइटिका , पक्षाघात , वायु विकार में शीघ्र लाभ पहुंचता है। साइटिका के तीव्र वेग में इसकी जड़ का काढ़ा तीव्र गति से चमत्कारी प्रभाव दिखता है.

मोच इत्यादि आने पर सहजन की पत्ती की लुगदी बनाकर सरसों तेल डालकर आंच पर पकाएं और मोच के स्थान पर लगाने से जल्दी ही लाभ मिलने लगता है |  ( सहजन के बीज , sahjan ke beej, sahjan ke fayde, sahjan ke beej ke fayde )

READ  अगर तिल है खूबसूरती पर दाग तो यह नुस्खा है चमत्कार

[ ये भी पढ़िए कैंसर का इलाज Cancer ka ilaj ]

सहजन की सब्जी के फायदे. – Sahjan ki sabji ke fayde

सहजन के फली की सब्जी खाने से पुराने गठिया , जोड़ों के दर्द , वायु संचय , वात रोगों में लाभ होता है।

इसके ताजे पत्तों का रस कान में डालने से दर्द ठीक हो जाता है साथ ही इसकी सब्जी खाने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी कटकर निकल जाती है,

इसकी जड़ की छाल का काढ़ा सेंधा नमक और हिंग डालकर पीने से पित्ताशय की पथरी में लाभ होता है

सहजन के पत्तों का रस बच्चों के पेट के किड़े निकालता है और उल्टी-दस्त भी रोकता है

ब्लड प्रेशर और मोटापा कम करने में भी कारगर सहजन का रस सुबह-शाम पीने से हाई ब्लड प्रेशर में लाभ होता है

इसकी पत्तियों के रस के सेवन से मोटापा धीरे-धीरे कम होनेलगता है

इसकी छाल के काढ़े से कुल्ला करने पर दांतों के कीड़े नष्ट होते है और दर्द में आराम मिलता है

इसके कोमल पत्तों का साग खाने से कब्ज दूर होता है इसके अलावा इसकी जड़ के काढ़े को सेंधा नमक और हिंग के साथ पीने से मिर्गी के दौरों में लाभ होता है। ( सहजन के बीज , sahjan ke beej, sahjan ke fayde, sahjan ke beej ke fayde )

इसकी पत्तियों को पीसकर लगाने से घाव और सूजन ठीक होते हैं

पानी के शुद्धिकरण के रूप में कर सकते हैं इस्तेमाल सहजन के बीज से पानी को काफी हद तक शुद्ध करके पेयजल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

इसके बीज को चूर्ण के रूप में पीसकर पानी में मिलाया जाता है। पानी में घुल कर यह एक प्रभावी नेचुरल क्लेरीफिकेशन एजेंट बन जाता है यह न सिर्फ पानी को बैक्टीरिया रहित बनाता है , बल्कि यह पानी की सांद्रता को भी बढ़ाता है।

READ  चुटकियों में सिरदर्द गयाब करने का घरेलू नुस्खा |

[ ये भी पढ़िए घुटने के दर्द का इलाज, ghutne ke dard ka ialj ]

सहजन का काढ़ा पीने से क्या-क्या हैं फायदे

कैंसर और पेट आदि के दौरान शरीर के बनी गांठ , फोड़ा आदि में सहजन की जड़ का अजवाइन , हींग और सौंठ के साथ काढ़ा बनाकर पीने का प्रचलन है यह भी पाया गया है कि यह काढ़ा साइटिका (पैरों में दर्द) , जोड़ों में दर्द , लकवा ,दमा,सूजन , पथरी आदि में लाभकारी है |

सहजन के गोंद को जोड़ों के दर्द और शहद को दमा आदि रोगों में लाभदायक माना जाता है। आज भी ग्रामीणों की ऐसी मान्यता है कि सहजन के प्रयोग से वायरस से होने वाले रोग ,जैसे चेचक के होने का खतरा टल जाता है

( सहजन के बीज , sahjan ke beej, sahjan ke fayde, sahjan ke beej ke fayde )

Related Post