दुनिया के अजीबोगरीब Time Zone, आखिर कहाँ है ग्रीनविच मीन टाईम GMT?

टाइम जोन (Time Zone) या मानक समय इसे आप क्षेत्रीय समय के नाम सेे भी जानते हैं यह 1884 में 13 अक्टूबर के ही दिन ग्रीनविच मीन टाइम तय किया गया था और दुनिया भर की घडियों का समय इसी टाइम जोन (Time Zone) सेे तय किया जाता है लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि आखिर इस टाइम जोन (Time Zone) को निर्धारित करने की क्‍या जरूरत है, आईये जानते हैं क्‍या है टाइम जोन ? What is Time Zone # Time Zone

18 वींं सदी से पहले दुनिया भर में सूर्य घड़ी (Sun Clock) सेे समय देखा और मिलाया जाता था, लेकिन सर सैंडफोर्ड फ्लेमिंग (Sir Sandford Fleming) 1884 में टाइम जोन को बनाया, जिससे दुनिया भर के समय को सही द‍िशा मिली

असल में जब सूर्य उदय होता है तो एक समय में पृथ्वी के किस एक ही हिस्से में रह सकता है। इस प्रकार पृथ्वी किसी हिस्से में सूर्य की तिरछी किरणें पड़ती हैं तो कहीं सीधी किरणें। इसीलिए जब किसी स्थान में दोपहर का समय होता है किसी स्थान में शाम का और किसी में रात का समय भी हो सकता है।

अगर पूरी दुनिया की घडियांं एक साथ मिला दी जायें तो बहुत बडी गडबड हो जायेगी जैसे किसी के यहां 5 बजे सुबह होगी तो किसी के यहां 5 बजे दोपहर तो किसी के यहां 5 शाम। इस समस्या को हल करने के लिए समय देशांश रेखाओं के आधार पर क्षेत्रीय समय को बनाया गया। # Time Zone

पूरी दुनिया के नक्‍शे को देशांश रेखाओं (Longitude lines) के आधार पर प्रत्येक 15 अंश के अंतर पर 24 बराबर बराबर के काल्‍पनिक हिस्सों में बाँट दिया गया है और इसकी शुरुआत (0 अंश) से होती है। यह 0 अंश वाली रेखा इंग्लैंड के ग्रीनविच में स्थित वेधशाला से शुरू होती है, समय की गणना यहींं आरंभ होती है। इसे अंतर्रराष्ट्रीय मानक समय (ग्रीनविच मीन टाईम) के नाम से जाना जाता है। ग्रीनविच रेखा से दाहिनी ओर वाले देशों का समय आगे होता है और ग्रीनविच रेखा से बाईं ओर वाले देशों का समय पीछे होता है # Time Zone

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इसी प्रकार हर देश का अपना मानक समय है भारत में यह रेखा जो कि इलाहाबाद के निकट नैनी से गुजरती है यही से भारत का राष्ट्रीय मानक समय माना जाता है भारत का मानक समय ग्रीनविच रेखा से 82.5° अंश दाहिनी ओर है, जिसका अर्थ है कि भारत का मानक समय ग्रीनविच के मानक समय से साढ़े पाँच घंटे आगे है। यानि जब ग्रीनविच रेखा के पास रात के 12 बजेंगे तब यहां के सुबह के 5.30 बजेंगे।

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समय कभी नहीं रुकता और अपनी रफ्तार से चलता रहता है. लेकिन दुनिया के अलग अलग हिस्से अलग अलग टाइमजोन में रहते हैं. वैसे कुछ देश समय समय पर अपनी घड़ियों को आगे पीछे करते रहते हैं. # Time Zone

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एक देश, एक टाइम जोन # Time Zone

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने 1949 में सत्ता संभालने के बाद देश में चल रहे अलग अलग टाइमजोनों को खत्म करके पूरे देश में एक टाइमजोन लागू किया. इसे अब बीजिंग टाइम कहते हैं जो ग्रीनविच मानक समय (जीएमटी) से आठ घंटा आगे है. इसका मतलब है कि देश के धुर पश्चिमी प्रांत शिनचियांग के लोगों को बहुत सवेरे उठना पड़ता है.

रात के उल्लू


स्पेन के तानाशाह फ्रांसिस्को फ्रांको दूसरे विश्व युद्ध के दौरान तटस्थ रहे. लेकिन 1940 में जर्मन तानाशाह हिटलर के साथ एकजुटता दिखाते हुए उन्होंने जीएमटी की जगह सेंट्रल यूरोपियन समय को अपना लिया. इसीलिए स्पेन में सूरज जरा देर से ही उगता और छिपता है. और उसी के मुताबिक लोगों की जिंदगी चलती है.

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अतीत से छुटकारा


उत्तर कोरिया ने 2015 में अपनी घड़ियों को आधा घंटा पीछे कर लिया. सरकार ने इसके लिए दलील दी कि वह जापानी औपनिवेशिक पहचानों से पिंड छुड़ाना चाहती है. कोरियाई प्रायद्वीप पर 1910 से 1945 तक जापानी शासन के दौरान एक ही  Time Zone था.

घड़ियां फिर आगे की


उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन जब हाल में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति से मिले तो दीवार पर लटकी घड़ियों में प्योंगयांग और सियोल का अलग अलग समय देखकर व्यथित हुए. इसके बाद उत्तर कोरिया ने फिर अपनी घड़ियां बदली और अब फिर उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया में एक ही समय है. # Time Zone

हिम्मत अलग होने की


समय के मामले में नेपाल को भी थोड़ा अलग कहा जा सकता है. उसने अपने पड़ोसी भारत से 15 मिनट आगे का समय चुना. इस तरह नेपाल का समय जीएमटी से 5.45 घंटा आगे है. इसके पीछे भी भारत से अलग दिखने की कोशिश थी. हालांकि नेपाल बहुत सी चीजों के लिए भारत पर निर्भर है. # Time Zone

बिजली बचाने के लिए

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने 2016 में देश की घड़ियों को 30 मिनट आगे करने को कहा. इस तरह उनसे पहले राष्ट्रपति शावेज ने 2007 में जो समय बदला, उसे मादुरो ने पलट दिया. 2007 में यह सोच कर समय बदल गया था कि सूरज की रोशनी ज्यादा देर तक रहने से बिजली की खपत कम होगी. # Time Zone

लंबी छलांग

समय में सबसे बड़ा बदलाव प्रशांत महासागर में बसे छोटे से देश समोआ ने किया. 2011 में उसने अपनी घड़ियों को पूरे 24 घंटे आगे कर दिया. पहले वहां का समय सिडनी से 21 घंटे पीछे था, जिसे 2011 में सिडनी से तीन घंटा आगे कर दिया गया. ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ संबंध बेहतर करने के लिए यह फैसला किया गया.

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डेलाइट सेविंग टाइम

जर्मनी समेत दुनिया के 50 से ज्यादा देशों में साल में दो बार घड़ियों का समय बदल जाता है. गर्मियों में सूरज की रोशनी का इस्तेमाल करने के लिए घड़ियों का समय एक घंटा आगे कर दिया जाता है जबकि सर्दियों में एक घंटा पीछे. इसे डेलाइट सेविंग टाइम कहते हैं. # Time Zone

भारत

पूरे भारत में साल भर एक ही समय चलता है. हालांकि पूर्वोत्तर इलाकों के लिए कई बार अलग टाइमजोन की मांग उठती है, क्योंकि वहां पर देश के बाकी हिस्सों के मुकाबले काफी पहले सूरज उग जाता है. हालांकि कभी इस मांग को गंभीरता से नहीं लिया गया. # Time Zone

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