निकाल फेंके घर से ये वास्तु दोष, होगी झट मंगनी पट ब्याह

बच्चों की शादी के विषय को लेकर हर मां-बाप परेशान रहते हैं। क्योंकि कईं बार अच्छे पढ़े-लिखे, होनहार, खूबसूरत और सफ़ल व्यवसायी होने के बाद भी अधिकतर युवक-युवतियां की शादी नहीं हो पाती या फ़िर शादी में कईं तरह की रूकावटें आती है। इसी बात को लेकर उनके माता-पिता अधिक परेशान रहते हैं और बच्चों की जन्मपत्री पंडितों व ज्योतिषों आदि को दिखाते-फ़िरते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि आखिर इस सबके पीछे क्या कारण हो सकता है। तो आपको बता दें कि आपके बच्चों के विवाह में विलंब का मुख्य कारण घर के कुछ वास्तु दोष भी हो सकते हैं। तो अगर आप भी अपने बच्चों के शादी में आ रही बाधाओं या देरी को लेकर हर वक्त परेशान रहते हैं तो इन वास्तुदोषों को दूर करने को लेकर विचार आवश्य करें। आप शायद नहीं जानते होंगे के अनियमित आकार के घरों में कुछ ऐसे वास्तुदोष होते हैं जो भाग्य के साथ-साथ शादी में भी रुकावटें पैदा करते हैं। तो यहां ज़रूर जान लें कि किस प्रकार के दोषों से आती है बच्चों के शादी में रुकावटें।

विवाह योग्य युवक-युवतियों के विवाह में विलंभ हो रहा है, तो सबसे पहले इस बात का ध्यान रखें कि उनके कमरे के दरवाजे़ का रंग गुलाबी हो और दीवारों पर हल्का पीला, सफ़ेद रंग। एेसा करने से कमरे से वास्तुदोष दूर होता है।


विवाह योग्य लड़के-लड़कियों को उत्तर या उत्तर-पश्चिम दिशा के कमरे में रहना चाहिए। इस दिशा में रहने से शादी के लिए अच्छे प्रस्ताव आने लगते हैं इस बात विशेष ध्यान रखें सोते समय आपका सर हमेशा पूर्व दिशा में होना चाहिए।

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विवाह योग्य युवक-युवतियों को अधूरे कमरे में नहीं रहना चाहिए या किसी ऐसे कमरे में नहीं रहना चाहिए जिसमें बीम हो या उसमें बीम लटका हुआ हो इस तरह के कमरे में रहने से विवाह में कई प्रकार की बाधाएं आती है।


जिनके बच्चे शादी के लिए राज़ी नहीं होते ऐसे युवक-युवतियों के कमरे में उत्तर दिशा की और क्रिस्टल बॉल, कांच की प्लेट या प्याली रख सकते हैं। इस उपाय से बच्चों का मन शादी के लिए राज़ी होने लगता है।


बहुत कोशिशों के बाद भी जिन विवाह योग्य युवक-युवतियों का विवाह न हो पा रहा हो, उन्हें विवाह के लिए अपने कमरे में पूर्वोत्तर दिशा में पानी का फव्वारा रखना चाहिए।

नेपाल के लोगों का मानना है कि ये जीवित देवियां आपदा के समय उनकी रक्षा करती हैं।

भारत के पड़ोसी देश नेपाल में भी हिंदू धर्म से जुड़ी अनेक परंपराएं और मान्यताएं प्रचलित हैं। इन्हीं में से एक परंपरा है छोटी लड़कियों को कुमारी देवी बनाने की। इस परंपरा के अंतर्गत 3 वर्ष की लड़कियों को महाकाली का स्वरूप माना जाता है और जब तक ये जवान नहीं हो जातीं, अर्थात जब तक इन्हें मासिक धर्म शुरू नहीं हो जाता, तब तक ये कुमारी देवी की पदवी पर रहती हैं और उसके बाद कोई अन्य बालिका कुमारी देवी बनाई जाती है।

रॉयल गॉडेस होती हैं कुमारी देवी
इस परंपरा की शुरुआत 17वीं शताब्दी के आरंभ में हुई थी। नेपाल के लोगों का मानना है कि ये जीवित देवियां आपदा के समय उनकी रक्षा करती हैं। जीवित देवी या कुमारी देवी शाक्य या वज्रचार्य जाति से संबंध रखती हैं। इन्हें नेवारी समुदाय द्वारा पहचाना जाता है। नेपाल में करीब 11 कुमारी देवियां होती हैं, जिनमें से रॉयल गॉडेस या कुमारी देवी को सबसे प्रमुख माना गया है।

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ऐसे चुनी जाती हैं जीवित देवियां
शाक्य और वज्राचार्य जाति की बच्चियों को 3 वर्ष का होते ही अपने परिवार से अलग कर दिया जाता है और उन्हें कुमारी नाम दे दिया जाता है। कुमारी देवी बनाने से पहले लड़कियों के सामने भैंस का कटा सिर रखा जाता है। कोई भी साधारण बच्ची उस दृश्य को देखकर भयभीत हो जाएगी लेकिन जो भी बच्ची बिना किसी डर के वहां रहती है, उसे मां काली का अवतार मानकर कुमारी देवी बनाया जाता है।

शाक्य वंश के लोग करते हैं सुरक्षा
कुमारी देवी बनने के बाद उन्हें कुमारी घर में रखा जाता है, जहां रहकर वे अपना ज्यादातर समय पढ़ाई और धार्मिक कार्यों में बिताती हैं। वह केवल त्यौहार के समय ही घर से बाहर निकल सकती हैं। जब भी किसी त्यौहार पर कुमारी देवी अपने आवास से बाहर निकलती हैं तब उनकी रक्षा का जिम्मा संभाले हुए शाक्य वंश के लोग उनकी पालकी को अपने कंधे पर उठाकर नगर में घुमाते हैं। ऐसी मान्यता है कि कुमारी देवी के दर्शन करना बहुत शुभ होता है