रात को पेट पर प्लास्टिक बांध सोई थी महिला, अगली सुबह हुआ ऐसा ‘चमत्कार’

सोशल साइट्स पर कॉलीन नाम की महिला द्वारा शेयर की गई फोटोज वायरल हो रही हैं। इस पोस्ट में कॉलीन ने बताया कि तीन बच्चों को जन्म देने के बाद उसका फिगर बिगड़ गया था। अपने फिगर को वापस पाने के लिए उसने चमत्कारिक तरीका अपनाया। इस तरीके को उसने कुछ रातों के लिए इस्तेमाल किया और रिजल्ट देखकर कॉलीन काफी खुश हैं। ​

मार्केट से सीवीड (समुद्री शैवाल) लोशन खरीदा

कॉलीन का दावा है कि इस तरीके से काफी आसानी से बढ़ा हुआ पेट कम किया जा सकता है। कॉलीन ने मार्केट से सीवीड (समुद्री शैवाल) लोशन खरीदा। इसके अलावा आपको पेट पर बांधने के लिए प्लास्टिक की जरुरत होगी।

– कॉलीन ने कुछ रातों के लिए अपने पेट पर सीवीड लोशन लगाने के बाद प्लास्टिक बांधा। प्लास्टिक को पेट पर टिकाने के लिए कॉलीन उसके ऊपर बैंडेज बांधती थी। इसके बाद वो सो जाती थीं। ऐसा उन्होंने कुछ रातों के लिए किया।

– इससे जो रिजल्ट सामने आए, उसने लोगों को भी हैरत में डाल दिया है। कॉलीन का दावा है कि इस तरीके से हर रात एक इंच पेट कम हो जाता था।

सबसे पहले अपने पेट पर सीवीड लोशन लगा लिया

उसके बाद इस तरह से पेट पर प्लास्टिक बांध लीजिए। ध्यान रखिए कि प्लास्टिक काफी टाइट ना बांधे। वरना सोने में परेशानी होगी।

प्लास्टिक को टिकाने के लिए उसके ऊपर बैंडेज बांध लीजिए।

आसिफा की वकील-परिवार नहीं चाहता मामले की CBI जांच हो, अब तो सच लग रहा कोई साजिश है इसके पीछे

कठुआ केस में जिस प्रकार की आशंका थी अब वैसा ही हो रहा है, कठुआ मामले में बड़ी साजिश का शक किया जा रहा है. आज इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुए जिसमें आरोपी पक्ष ने CBI जांच की मांग की जबकि पीडिता पक्ष की वकील ने CBI जांच की मांग से इनकार कर दिया. उनका कहना था कि हम पुलिस की जांच से संतुष्ट हैं. अब आप खुद सोचिये, यह ऐसा पहला पीड़ित परिवार है जो मामले की CBI जांच नहीं चाहता, दीपिका सिंह राजवत पहली ऐसी वकील हैं तो अपने केस की जांच CBI से नहीं कराना चाहतीं, वहीँ पीड़ित पक्ष CBI जांच चाहता है ताकि सच बाहर आये. बता दें कि आसिफा के अपने माँ-बाप नहीं थे, वह चाचा के साथ रहती थी. उसके माँ-बाप उसके नाम से कुछ जमीन छोड़ गए थे, हो सकता है यह जमीन का मामला हो.

चार्जशीट ही फाइल नहीं की

बता दें कि आज आसिफा मर्डर के आठों आरोपियों को जिला अदालत में पेश किया गया, कश्मीर क्राइम ब्रांच की शर्मनाक लापरवाही सामने आयी, उन्होंने अभी चार्जशीट ही फाइल नहीं की है, आरोपियों को चार्जशीट की कॉपी ही नहीं दी गयी. कोर्ट ने सभी आरोपियों को चार्जशीट की कॉपी देने का आदेश दिया है और अगली तारीख 28 अप्रैल को दे दी है.

आज आरोपियों ने बड़ा खुलासा किया. मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्य अभियुक्त सांजी राम ने कहा कि हमें फंसाया जा रहा है. हम लोगों का नार्को टेस्ट करवा लो सच सामने आ जाएगा. नार्को टेस्ट जरूर होना चाहिए और हमने अदालत से भी यही मांग की है.

बता दें कि आसिफा की हत्या जनवरी महीनें में हुई थी, उसकी लाश एक मंदिर में मिली थी. पीड़ित पक्ष का कहना है कि मंदिर में आसिफा के साथ आठ दिनों तक गैंगरेप किया गया और उसकी हत्या करके आठ दिनों तक लाश को मंदिर में छिपा दिया गया जबकि आरोपी पक्ष का कहना है कि असीफा का क़त्ल कहीं और किया गया, रात में उसकी लाश को मंदिर में फेंककर उन्हें फंसा दिया गया.

आरोपी पक्ष के लोग इस मामले की जांच CBI को देने की मांग कर रहे हैं लेकिन पीड़ित पक्ष कश्मीर क्राइम ब्रांच की जांच से संतुष्ट है. यह पहला ऐसा केस है जिसमें आरोपी पक्ष CBI जांच और नार्को टेस्ट की मांग कर रहा है जबकि पीड़ित पक्ष CBI जांच से भाग रहा है.

कठुआ केस में आरोपियों के नाम

सांजी राम, मंदिर का पुजारी
विशाल जंगोत्रा, सांजी राम का बेटा
नाबालिग, सांजी राम का भतीजा
परवेश कुमार, सांजी राम का दोस्त
दीपक खजुरिया, विशेष पुलिस ऑफिसर, साजिश करना
सुरेंदर वर्मा, विशेष पुलिस ऑफिसर, साजिश करना
तिलक राज, जाँच अधिकारी, घूस लेकर सबूत मिटाना
आनंद दत्ता, सब-इंस्पेक्टर, घूस लेकर सबूत मिटाना

बहुत सुन लिया TRP वाले बिकाऊ मीडिया का झूठ, अब पढ़ें कठुआ कांड का सच, हिल जाएगा दिमाग

अब मीडिया चैनल सिर्फ TRP के लिए काम करते हैं, झूठी खबरों को भी सच बनाकर बवाल मचा दिया जाता है क्योंकि ऐसा करने पर TRP बढ़ जाती है, कुछ दिनों तक बम्पर कमाई होती है, देशवासी मूर्ख बनकर उनकी ख़बरें सुनते हैं और उनकी बातों में आकर लड़ने लगते हैं. कठुआ मामले में भी ऐसा ही है जिसमें मीडिया ने TRP के लिए झूठ को सच बनाकर दिखा दिया. ऐसा इसलिए किया गया ताकि कांग्रेस और अन्य विरोधी पार्टियों को मोदी सरकार के खिलाफ मुद्दा मिल सके और कांग्रेस को मुद्दा मिल भी गया है, आपने देखा होगा कि मोदी सरकार के खिलाफ अभियान चल रहा है, सभी बीजेपी कार्यकर्ताओं को रेपिस्ट बताया जा रहा है.सबसे पहले कठुआ मामले का सच जान लीजिये, यह मामला आज का नहीं बल्कि जनवरी महीनें का है, जी हाँ, 4 महीनें पुराना है, तो कहाँ चला गया था नेशनल मीडिया. क्या सो रहा था अब तक.

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जानकारी के अनुसार आसिफा नाम की लड़की जिसके साथ यह घटना हुई, वह गुर्जर बकेरवाल समुदाय से आती है. नाम से तो यह मुस्लिम लड़की है लेकिन इन्हें खानाबदोश कहा जाता है. नाम भले ही मुस्लिम लगे लेकिन ये भी हिन्दू ही हैं. दूसरी बात, ये समुदाय देशभक्त होता है, इन्होने कारगिल युद्ध में भारतीय सेना की मदद भी की थी. आसिफा को जनवरी में किडनैप करके हत्या कर दी गयी थी लेकिन पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रेप नहीं दिखाया गया था.

आसिफा के बारे में एक बात और पता चली है कि इसके माता पिता की मौत हो चुकी है, इसके नाम पर कुछ जमीन छोड़ी गयी है, जनवरी में इसकी मौत हुई थी लेकिन उस समय नेशनल मीडिया ने इसकी सुध नहीं ली.

अब नेशनल मीडिया बता रही है कि आसिफा के साथ मंदिर में कई दिनों गैंगरेप किया गया और उसके बाद हत्या कर दी गयी. यह भी कहा जा रहा है कि इसकी लाश 8 दिनों तक मंदिर में पड़ी रही.

अब इस मामले में का सच जानने की जरूरत है. जब आसिफा अगवा हुई तो पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई गयी कि आसिफा गायब हो गयी है और मिल नहीं रही है. उसके बाद आसिफा की खोज शुरू हुई लेकिन पुलिस उसे ढूंढ नहीं सकी. 8 दिनों बाद उसकी लाश कठुआ के मंदिर में मिली.

नेशनल मीडिया ने मंदिर में गैंगरेप और मर्डर की खबर तो दिखा दी लेकिन शायद मंदिर देखने भी नहीं गयी होगी. जिस मंदिर में उसकी लाश पायी गयी वह आबादी के बीच में स्थिति है. उसमें ना तो कोई लॉक है और ना ही कोई दरवाजा है, उसमें ना तो कोई कमरा है और ना ही कोई तहखाना है जहाँ पर किसी को छुपाया जा सके. विल्कुल हर तरफ से खुला मंदिर है और कोई भी किसी भी समय आ जा सकता है. मंदिर में ऐसा हो ही नहीं सकता कि 8 दिन तक लड़की की लाश रखी रहे और किसी को पता ना चले. दो तीन दिन में ही स्मेल आने लगती है ऐसे में 8 दिन तक किसी की लाश पड़ी रहे और किसी को पता ना चले ये हो ही नहीं सकता.

जब 8 दिन बाद आसिफा की लाश मंदिर में मिली तो पुलिस ने जांच की, उस वक्त उसकी लाश पर गीली मिटटी लगी हुई थी, यह चौंकाने वाला है क्योंकि मंदिर में संगमरमर का फर्श है ऐसे में लाश पर मिटटी लगी होना इस बात का सबूत है कि लड़की से गैंगरेप या मर्डर मंदिर में नहीं बल्कि कहीं और किया गया था.

इसके बाद पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेजा, डॉक्टर ने अपनी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में लिखा कि लड़की की ह्त्या हुई है लेकिन उसके साथ रेप नहीं किया गया है. इसके अलावा मीडिया चैनल आसिफा की मौत का जो समय बता रहे हैं डॉक्टर से उसे भी खारिज कर दिया और मौत का समय उससे पहले बताया. यहाँ पर TRP वाली मीडिया रेप और गैंगरेप का झूठ फैला रही है क्योंकि आसिफा के साथ रेप हुआ ही नहीं था.

एक बात और ध्यान देने लायक है. डॉक्टर ने आसिफा की मौत का जो समय बताया था उसके अनुसार उसकी मौत मंदिर में हुई ही नहीं थी. इसके अलावा उसकी बॉडी पर गीली मिटटी थी, यह तभी हो सकता है जब क्षेत्र में बारिश हुई हो और उसकी लाश भीग गयी हो लेकिन पूछताछ में लोगों ने बताया कि वहां पर कई दिनों से बारिश भी नहीं हुई थी, इसका मतलब है कि आसिफा की हत्या करके उसे मंदिर में लाया गया था, या फेंक दिया गया था. यहाँ पर TRP वाले मीडिया के इस झूठ का भी पर्दाफाश हो गया जो बता रहा है कि मंदिर में आठ दिनों तक आसिफा का गैंगरेप किया गया और उसकी हत्या कर दी गयी. सच यह है कि आसिफा का किसी अन्य स्थान पर मर्डर करके, कई दिनों तक छिपाकर रखा गया, उसके बाद रात को मंदिर में लाश फेंक दी गयी और पुलिस को इसकी सूचना दे दी गयी ताकि सारा आरोप मंदिर और हिन्दुओं पर लगा दिया जाए.

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एक बात यह भी जानिये, जब मंदिर में आसिफा की लाश को फेंका गया तो लोगों में डर फ़ैल गया. यह काम हिन्दुओं में डर फैलाने के लिए ही किया गया था. ऐसा हुआ भी, करीब 100 परिवारों ने तुरंत ही पालयन कर दिया, जब मामले की पड़ताल की गयी तो पता चला कि वहां पर हजारों रोहिंग्या बस गए हैं और वही लोग गलत काम कर रहे हैं, लोगों को असुरक्षा महसूस होने लगी तो वहां से पलायन करने लगे. इसके बाद हिन्दू नेताओं का जमीर जागा और रोहिंग्या लोगों को वहां से हटाने का आन्दोलन शुरू हो गया. ये सब जनवरी 2018 की बात है. TRP वाला मीडिया आज इस बात को इसलिए उठा रहा है क्योंकि मोदी सरकार के खिलाफ उसको माहौल बनाना है.

जब वहां पर जनवरी से पहले हजारों रोहिंग्या बस गए तो क्राइम बढ़ने लगा, रोजाना बहन बेटियों को छेड़ने, मारने पीटने और किडनैपिंग की घटनाएं सामने आने लगीं. हिन्दुओं को जब अधिक असुरक्षा मह्सूस हुई तो रोहिंग्या के खिलाफ अभियान छेड़ दिया. सरकार से मांग की जाने लगी कि रोहिंग्या को तुरंत डिपोर्ट किया जाए. लोगों ने बड़े स्तर पर रोहिंग्या के खिलाफ धरने शुरू कर दिए.

जब नेशनल मीडिया ने धरने और रोहिंग्या के खिलाफ आन्दोलन की आवाज सुनी तो अपने लोगों को वहां पर भेजा कि पता लगाओ कि वहां पर रोहिंग्या हैं या नहीं हैं. इसके बाद जब पत्रकार रोहिंग्या के बीच में गए तो कुछ लोगों को पीटा भी गया और इसकी खबर भी आयी थी. जब मीडिया के लोग पीटे गए तो यह भी हाईलाइट हो गया कि वहां पर रोहिंग्या हैं और हजारों की संख्या में हैं.

आपको बता दें कि स्थानीय लोगों का मानना है कि आसिफा का मर्डर रोहिंग्या ने किया है और उसे मारकर मंदिर में फेंका है ताकि लोग डर जाएंगे और वहां से भाग जाएं.

रोहिंग्या के मुद्दे को दबाने के लिए जम्मू-कश्मीर सरकार ने इसकी जांच कश्मीर क्राइम ब्रांच को सौंपी और डॉक्टर पर दबाव बनाकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट को बदलने का दबाव बनाया, उसके बाद डॉक्टर ने दूसरी रिपोर्ट बनायी जिसमें लिखा कि आसिफा के साथ पहले रेप हुआ और उसके बाद उसकी हत्या की गयी. डॉक्टर ने खुद कबूल किया है कि पोर्टमार्टम रिपोर्ट बदलने के लिए उसे फ़ोर्स किया गया था.

खुद बीजेपी वालों का कहना है कि महबूबा मुफ़्ती ने इस मामले को जान बूझकर रि-ओपन किया है ताकि रोहिंग्या का मुद्दा दब जाए, इसीलिए डॉक्टर को फ़ोर्स करके रिपोर्ट बदलवाई गयी और रेप होने की बात जोड़ी गयी.

इसके बाद लड़की के नाम को मीडिया को दिया गया ताकि मीडिया मुस्लिम लड़की के साथ मंदिर में गैंगरेप और मर्डर की बात दिखाए और मुद्दा साम्प्रदाईक बन जाए, ऐसा हुआ भी है. मीडिया ने विल्कुल वैसी ही खबर दिखाई है जैसा साजिशकर्ता चाहते थे. रोहिंग्या का मुद्दा विल्कुल दबा दिया गया. मीडिया किसी भी गैंगरेप पीड़िता का नाम नहीं लिखती लेकिन इस मामले में नाम लिखा गया क्योंकि आसिफा नाम देखने पर ही पता चलता है कि पीडिता मुस्लिम है.

मंदिर में लाश इसलिए फेंकी गयी ताकि लोग हिन्दुओं और पुजारी पर शक करें और हिन्दुओं को रेपिस्ट और आतंकी बोलना शुरू कर दें, ऐसा हुआ भी, अब भारत के जिहादी और मोदी विरोधी पार्टियों के लोग ऐसा ही बोल रहे हैं, हिन्दुओं को रेपिस्ट और आतंकी बोला जा रहा है, सोशल मीडिया पर अभियान चल रहा है. मीडिया भी साजिशकर्ताओं की धुन पर नाच रही है.

यहाँ पर महबूबा मुफ़्ती ने एक और चालाकी दिखाई. जाँच जम्मू रीजन की पुलिस कर रही थी लेकिन उन्होंने यह मामला कश्मीर रीजन को सौंप दिया और उसकी SIT बना दी जिसमें सिर्फ कश्मीर रीजन के पुलिस अफसरों को रखा गया है जिसमें से कुछ गलत छवि के हैं और उनपर कानूनी कार्यवाही भी हुई है. SIT का जो चीफ है वह खुद बहुत बड़ा कट्टरपंथी किस्म का आदमी है, कट्टरपंथी है और कई बार सस्पेंड हो चुका है.

स्थानीय लोग इस मामले की CBI जांच की मांग कर रहे हैं ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए और मामले का सच सामने आ जाए लेकिन महबूबा मुफ़्ती CBI जांच नहीं चाहतीं क्योंकि इससे रोहिंग्या मामले का सच सामने आ जाएगा, पूरे देश को पता चल जाएगा कि जम्मू में कितनी भारी संख्या में रोहिंग्या को बसाया गया है और वे क्षेत्र के लिए कितने खतरनाक बन गए हैं.

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इस मामले में हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए SIT के कट्टरपंथी चीफ ने क्षेत्र के कुछ हिन्दुओं को उठा लिया, उन्हें टॉर्चर किया और उन्हें टॉर्चर करके मामले में आरोपी बना दिया. मार के आगे हर आदमी टूट जाता है, हाल ही में गुरुग्राम पुलिस ने अशोक को टॉर्चर करके किस तरह से उससे हत्या का जुर्म कबुलवा लिया था, यह पूरे देश ने देखा था. पुलिस वाले टॉर्चर करके अच्छे अच्छों को फंसा देते हैं.

इस मामले में मीडिया निगेटिव रिपोर्टिंग कर रही है क्योंकि पीडिता का नाम मुस्लिम है, उन्हें पता है कि मुस्लिम नाम देखकर भारत का पूरा अफजल गैंग, जिहादी गैंग, JNU गैंग, बॉलीवुड गैंग, वामपंथी गैंग, नक्सली गैंग, प्रो-पाकिस्तानी गैंग एक हो जाएगा और उन्हें TRP बढ़ाकर कमाई करने का बढ़िया मौका मिल जाएगा. मीडिया इसमें सफल भी रही है, उसनें मामले को टूट दे दिया है. खूब कमाई हो रही है और कुछ पैसा साजिशकर्ताओं ने भी दिए होंगे.

आप खुद ध्यान दीजिये, मामला जनवरी का है लेकिन मीडिया ने आँखें आज खोली हैं. महबूबा मुफ़्ती रोहिंग्या मुद्दे को इसलिए दबाना चाहती हैं क्योंकि अगर जम्मू में रोहिंग्या बसा दिए जाएंगे तो उनका वोटबैंक जम्मू में भी बन जाएगा, इसीलिए रोहिंग्या या साजिशकर्ताओं द्वारा आसिफा की हत्या करवाई गयी होगी, मंदिर में लाश फेंका गया होगा, इल्जाम हिन्दुओं पर लगाया गया होगा, जांच कश्मीर क्राइम ब्रांच को सौंपी गयी ताकि झूठ को सच बनाया जा सके, इसके अलावा SIT बनाकर उसका चीफ एक ऐसे अफसर को बना दिया गया जो कट्टरपंथी किस्म का है, कई बार सस्पेंड हो चुका है और महबूबा मुफ़्ती के इशारे पर चलता है, अगर नहीं चलेगा तो नौकरी जाएगी.

इस मामले में कांग्रेस भी शामिल है क्योंकि जम्मू बार एसोसिएशन के चीफ बीएस स्लाथिया हैं वो कांग्रेसी नेता गुलाम नबी आजाद के ख़ास आदमी हैं और उनके वकील भी हैं. उन्होंने जान बूझकर क्राइम ब्रांच को रोककर मामले को तूल दिया और उसके बाद भड़काऊ बयान देकर समस्त जम्मू बार एसोसिएशन को एंटी-नेशनल साबित करना चाहा, उन्हें मामले की जांच CBI को देने की मांग करनी चाहिए थी लेकिन उन्होंने इसे हिन्दू मुस्लिम का रंग दे दिया.

इससे भी हैरानी वाली बात ये है कि बीएस स्लाथिया कांग्रेसी हैं, कश्मीर क्राइम ब्रांच को उन्होंने रोका, हिन्दू मुस्लिम का रंग उन्होंने दिया लेकिन कांग्रेस ने इसका इल्जाम बीजेपी पर लगाया. हिन्दू संगठनों को रेपिस्ट बताया जाने लगा, केजरीवाल जैसे नेताओं ने हिन्दुओं, हिन्दू संगठनों को रेपिस्ट बताया, भाजपा वालों को भी रेपिस्ट बताया जाने लगा.

इस मामले की असलियत लाने के लिए सीबीआई जांच जरूरी है लेकिन आसिफा के लिए न्याय तो सभी मांग रहे हैं लेकिन CBI जांच की मांग कोई नहीं कर रहा है क्योंकि इससे झूठ का पर्दाफाश होगा, रोहिंग्या समस्या का खुलासा होगा, कई लोग फंसेंगे और मीडिया वाले शर्म से डूब मरेंगे.

सूरत में 11 वर्षीय बच्ची से 8 दिन तक रेप और दर्दनाक हत्या, TRP मीडिया नहीं बताएगा नाम

भारत का मीडिया सिर्फ TRP देखने लगा है. जब गैंगरेप पीड़िता कोई मुस्लिम होती है तो उसका नाम लेकर ख़बरें दिखाई जाती है ताकि पूरी दुनिया को लगे कि भारत में मुस्लिमों के साथ अत्याचार हो रहा है, मुस्लिम बच्चियों का रेप हो रहा है लेकिन जब रेप पीडिता कोई हिन्दू होती है तो मीडिया ना तो उस मामले को तूल देता है और ना ही पीडिता का नाम बाहर करता है.

जम्मू में 8 वर्षीय बच्ची का मर्डर हुआ तो रेप की पुष्टि ना होने के बाद भी मीडिया ने गैंगरेप और मर्डर बताकर पीडिता का नाम भी बाहर कर दिया और आसिफा के लिए पूरा देश न्याय मांगने लगा.

आज ऐसा ही मामला गुजरात के सूरत से सामने आया है जहाँ पर 11 वर्षीय बच्ची के साथ हैवानियत की हदें पार की गयी हैं. इस मासूम सी बच्ची के साथ 8 दिन तक बलात्कार होता रहा, बच्ची के गुप्तांग में लकड़ी से चोट की गयी हैं, शरीर पर 80 घाव के निशान हैं. दर्दनाक ह्त्या की गयी है लेकिन इस बच्ची के लिए ना तो न्याय माँगा जा रहा है और