सीरिया युद्ध से प्रभावित बेसहारा बच्चों के लिए भगवान बने ‘खालसा ऐड’ के सदस्य

सीरिया एक बार फिर से युद्ध की विभीषिका झेलते हुए खबरों में है। पिछले सात सालों से लगातार चल रहे इस युद्ध में लाखों नागरिकों की जान जा चुकी है। जब भी मीडिया के जरिए वहां युद्ध से प्रभावित बच्चों की तस्वीरें आती हैं, दिल दहल उठता है। सीरिया में विद्रोहियों के कब्जे वाले पूर्वी घोउटा इलाके में सीरियाई सरकार के हवाई हमले में सात दिनों में करीब 500 नागरिकों की मौत हो गई है। काफी लंबे समय से चल रहे संघर्ष में अब तक लाखों लोग मारे जा चुके हैं और हजारों बच्‍चे अनाथ हो चुके हैं।

इस स्थिति में मानवता की मदद करने के लिए इंटरनेशनल एनजीओ ‘खालसा ऐड’ युद्ध प्रभावित इलाकों में जाकर काम कर रहा है। वे खाने का इंतजाम करने से लेकर कपड़े, रहने और स्वास्थ्य की देखभाल कर रहे हैं।

 

सीरिया गृहयुद्ध में लाखों बच्चे बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। उन्हें भावनात्मक सहयोग देने से लेकर उनके खाने पीने का इंतजाम खालसा ऐड के सदस्य कर रहे हैं। संगठन ने तुर्की में भी शरणार्थी बच्चों के लिए 14 टन खाना और पैरों में पहनने के लिए चप्पल-जूते भिजवाए हैं। इस एनजीओ की स्थापना रविंद्र सिंह ने 1999 में की थी। वे कोसोवो शरणार्थियों की हालत देखकर द्रवित हो उठे थे और कुछ करने का फैसला ले लिया था। अब तक यह संगठन कई देशों में काम कर के लाखों लोगों की मदद कर चुका है।

बीते साल बांग्लादेश और म्यांमार बॉर्डर पर रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए भी खालसा ऐड ने खाने-पीने का इंतजाम किया था। श्रीलंका में जब बाढ़ ने भीषण तबाही मचाई थी तो खालसा ऐड ने वहां पर कम्यूनिटी किचन की स्थापना की थी। हमारी दुनिया को खालसा ऐड जैसे संगठनों और इंसानियत की सेवा करने वाले लोगों की सख्त जरूरत है। खालसा ऐड दुनिया के उन कुछ एनजीओ में शामिल है जो बिना किसी भेदभाव के कहीं भी मदद करने पहुंच जाते हैं।

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