शीला दीक्षित की दिल्ली में अचानक से सक्रियता बढ़ी, क्या उपचुनावों में वही होंगी पार्टी का चेहरा

ऐसा लग रहा है कि दिल्ली में कांग्रेस के पास शीला दीक्षित के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा है क्योंकि अजय माकन को कमान सौंपने के बाद से दिल्ली में कांग्रेस की हालत और खराब होती चली गई और पार्टी में गुटबाजी की शिकार हो गई. अजय माकन से ही नाराज होकर अरविंदर सिंह लवली दिल्ली नगर निगम के चुनाव के बीच में ही बीजेपी में शामिल हो गए थे.

नई दिल्ली: दिल्ली में आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को लाभ के पद के मामले में अयोग्य ठहराए जाने के बाद अब उपचुनाव की घोषणा कभी भी हो सकती है. हालांकि हाईकोर्ट में मामला है औक उपचुनावों पर अंतरिम रोक लगी हुई है. लेकिन इस बीजेपी और कांग्रेस और साथ में आम आदमी पार्टी भी तैयारी कर रही है. दिल्ली में विधानसभा में कांग्रेस के पास एक भी विधायक नहीं है और बीजेपी के विधायकों की संख्या भी तीन ही है. दोनों पार्टियों की नजरें 20 विधानसभा सीटों के उपचुनावों पर हैं. कांग्रेस में कुछ दिन पहले ही अरविंदर सिंह लवली की वापसी हुई है. दूसरी ओर शीला दीक्षित की भी सक्रियता अचानक से बढ़ गई है. माना जा रहा है कि पार्टी आलाकमान एक बार फिर से उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देना जा रहा है. दिल्ली में विधानसभा चुनाव में हुई हार के बाद वह बिलकुल पीछे चली गई थीं. हालांकि फिर उनको यूपी विधानसभा चुनाव में सीएम पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया लेकिन समाजवादी पार्टी से से समझौता होने के बाद एक तरह से उनको फिर से अनदेखा कर दिया. पार्टी के इस फैसले से वो और उनके बेटे संदीप दीक्षित काफी नाराज भी थे. लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि दिल्ली में कांग्रेस के पास शीला दीक्षित के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा है क्योंकि अजय माकन को कमान सौंपने के बाद से दिल्ली में कांग्रेस की हालत और खराब होती चली गई और पार्टी में गुटबाजी की शिकार हो गई. अजय माकन से ही नाराज होकर अरविंदर सिंह लवली दिल्ली नगर निगम के चुनाव के बीच में ही बीजेपी में शामिल हो गए थे.

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पिछले तीन-चार दिनों में दिल्ली में कांग्रेस के अंदर कई घटनाएं हुई हैं  और शीला दीक्षित अचानक फिर से सक्रिय हो गई हैं.  कांग्रेस की वरिष्ठ नेता दीक्षित ने मोदी सरकार पर जनता से किए वादों को पूरा नहीं करने के लिए प्रहार करते हुए कहा है कि राजनीति में झूठ ज्यादा देर नहीं चलता और ‘लोग अब कांग्रेस को याद करने लगे हैं.’’उन्होंने इसके साथ ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल से भी सवाल किया कि वह अगर उपराज्यपाल से टकराव ही मोल लेते रहेंगे तो काम कब करेंगे? दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने  कहा, ‘‘अब लोग कांग्रेस को याद करने लगे हैं. कांग्रेस जो कहती थी, वह करती थी या करने के बाद कहती थी.  ऐसा नहीं था कि वह केवल कहती थी.’’ उन्होंने कहा ,‘‘आप स्वयं ही देख लीजिए. टूजी, थ्रीजी सब झूठा निकला. राजनीति में ऊंच नीच अवश्य चलती है किंतु मेरा यह मानना है कि राजनीति में झूठ ज्यादा देर तक नहीं टिकता ।’’प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार की चर्चा करते हुए कांग्रेस की वरिष्ठ नेता ने कहा कि मोदी ‘वक्ता-प्रवक्ता’ तो बहुत अच्छे हैं किंतु जमीन पर कुछ काम हुआ दिखाई नहीं देता.

यह पूछे जाने पर कि क्या कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अब इतने परिपक्व हो गये हैं, कि वह कांग्रेस को बेहतर ढंग से चला सकें और प्रधानमंत्री मोदी का मुकाबला कर सकें, शीला ने कहा, ‘‘बिल्कुल हो गये हैं। हमें यह समझना होगा कि परिपक्वता कोई ऐसी चीज नहीं कि दरवाजा खोला या पेच घुमाया और यह आ गयी। यह आती है अनुभव से। वे दिन प्रति दिन नए नए अनुभव ले रहे हैं और अच्छी बात है कि वह इसका फायदा उठा रहे हैं.’’ उन्होंने कहा कि जो काम हमने दिल्ली में शुरू किये थे, जैसे सिग्नेचर ब्रिज हो या अन्य ब्रिज और परियोजनाएं हों, वे सब वैसे के वैसे ही पड़े हुए हैं. केजरीवाल कह रहे थे कि हम आये तो छह महीने में सिग्नेचर ब्रिज बना देंगे. वास्तव में वह छह महीने में बन भी जाता क्योंकि उसका सारा मोटा मोटा काम तो हो ही चुका था. पुल को नदी से ऊपर ले जाने के लिए जो आवश्यक सामग्री चाहिए थी, वह भी चीन से आयात हो चुकी थी. जब सब कुछ हो गया था तो आप काम क्यों नहीं करते हैं? इसलिए अब लोगों को शंका होने लगी है कि ये बातें तो बहुत करते हैं किंतु नीतियों को कार्य रूप नहीं देते.

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