श्रीनगर: फिर हुआ सुंजवां जैसा आतंकी हमला, एक जवान शहीद, मुठभेड़ जारी

सीआरपीएफ कैंप पर फिर से आतंकी हमला

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर के करण नगर स्थित सीआरपीएफ कैंप पर फिर से आतंकी हमला हुआ है। हमले में एक जवान के शहीद होने की खबर आ रही है। जवानों की जवाबी कार्रवाई चल रही है। आतंकी सीआरपीएफ कैंप में घुसने की कोशिश कर रहे थे। आतंकियों के एक इमारत में छिपे होने का शक जताया जा रहा है। आतंकियों की संदिग्ध गतिविधियों के बारे में सुबह चार बजे पता चला था। इससे पहले रविवार (11 फरवरी) को ऐसे ही हमले को सीआरपीएफ ने नाकाम कर दिया था। सीआरपीएफ ने एके-47 लिए 2 आतंकियों को खदेड़कर उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया था।

समाचार एजेंसी एएनआई की खबर के मुताबिक दो आतंकवादी बैग और एके-47 लेकर श्रीनगर में सीआरपीएफ कैंप पर हमला करने की फिराक में देखे गए थे, इसके बाद संतरियों ने उन पर गोलियां चलाईं, जिससे वे मौके से फरार हो गए। कैंप और उसके आस-पास खोजी अभियान चल रहा है। बता दें कि शनिवार (10 फरवरी) को तड़के करीब पौने पांच बजे जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने श्रीनगर के सुंजवां स्थित सेना के कैंप पर हमला कर दिया था। इसमें पांच जवान शहीद हो गए थे। एक स्थानीय नागरिक की भी मौत हो गई थी और 9 लोग घायल हुए थे। करीब 30 घंटे चली सेना की जवाबी कार्रवाई में चारों आतंकी ढेर कर दिए गए थे। आतंकियों के सफाए के लिए वायुसेना के कमांडो ने भी मोर्चा संभाला था। सेना के विशेष बलों और अभियान दल ने भारी गोलीबारी के बीच इलाके की घेराबंदी की थी।

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सेना के एक अधिकारी ने कैंप पर हुए हमले की जानकारी देते हुए बताया था कि सेना ने जम्मू कश्मीर लाइट इंफैंट्री की 36 ब्रिगेड के शिविर में मौजूद 150 फैमिली क्वार्टरों से लोगों को निकालने के बाद आतंकवादियों को मार गिराया। सूत्रों से खबर मिली थी कि सुंजवां स्थित सेना के कैंप के जवानों को शनिवार तड़के संदिग्ध गतिविधि की जानकारी लगी थी। इस पर जवानों ने कार्रवाई करते हुए गोलीबारी की थी, उधर से आतंकवादियों ने भी गोलीबारी शुरू कर दी थी और कैंप के रिहायशी इलाके में छिप गए थे। वे जूनियर कमीशंड अधिकारियों (जेसीओ) के आवासीय क्वार्टरों में घुस गए थे। हमले में घायल लोगों में एक जूनियर सैन्य अधिकारी की बेटी भी थी, जो स्कूल की छुट्टियों के दौरान अपने पिता से मिलने घर आई थी।

इस हमले के पीछे कहा जा रहा था कि आतंकियों ने 2013 में आतंकी अफजल गुरु को दी गई फांसी की बरसी के दिन बड़े पैमाने पर आतंकी हमले करने साजिश रची थी। इस बारे में खुफिया एजेंसियों ने पहले ही आगाह कर दिया था। आतंकवादी हमले में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का हाथ बताया गया था।

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