कल इस मुहूर्त में करें पूजन, हर तरह के रोग होंगे दूर-28 जनवरी 2018 रविवार

क्या है महत्त्व?

विवार दि॰ 28.01.18 को माघ शुक्ल द्वादशी को भीष्म द्वादशी पर्व मनाया जाएगा। इसे आमलकी गोविंद व तिल उत्पत्ति द्वादशी के नाम से जाना जाता है। शास्त्रनुसार इसी दिन पांडवों ने गंगा के तट पर भीष्म पितामह का अंतिम संस्कार किया था। मान्यतानुसार इसका महात्म स्वयं भगवान कृष्ण ने भीष्म को बताया था और भीष्म ने इसका पालन किया इसी कारण इसे भीष्म द्वादशी कहते हैं। भीष्म द्वादशी के दिन षोडशोपचार विधि से भगवान् लक्ष्मीनारायण की पूजा करने का विधान है।

इस दिन अपने पूर्वजों का तर्पण करने का भी विधान है। कुछ लोग इस दिन भीष्म पितामह के निमित्त भी तर्पण करते हैं। इस व्रत में ब्राह्मण को दान, पितृ तर्पण, हवन, आदि करने से अमोघ फल की प्राप्ति होती है। इस दिन लक्ष्मीनारायण के पूजन में केले के पत्ते व फल, पंचामृत, सुपारी, पान, तिल, मोली, रोली, कुंकुम, दूर्वा का उपयोग किया जाता है। पूजा के लिए दूध, शहद केला, गंगाजल, तुलसी पत्ता, मेवा मिलाकर पंचामृत तैयार कर प्रसाद बनाकर व इसका भोग लक्ष्मीनारायण को लगाए जाने का विधान है। इस पर्व के विशेष व्रत, पूजन और उपाय से नि:संतानों को संतान प्राप्ति होती है, सर्व रोग दूर होते हैं व सौभाग्य प्राप्त होता है।

विशेष पूजन विधि:

पूर्वमुखी होकर लाल वस्त्र पर भगवान लक्ष्मी-नारायण का चित्र स्थापित करें। तांबे की दिये में तिल के तेल का दीप करें, गुगल धूप करें, रोली, लाल फूल, केले के पत्ते चढ़ाएं, खजूर का भोग लगाएं। लाल चंदन की माला से इन विशेष मंत्र का 1 माला जाप करें। जाप के बाद खजूर किसी गरीब को दान करें।

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पूजन मुहूर्त: प्रातः 09:55 से प्रातः 10:55 तक।
पूजन मंत्र: ॐ लक्ष्मी-नारायणाय नमः॥

उपाय

सर्व रोग दूर करने हेतु जायफल सिर से वारकर लक्ष्मी-नारायण के निमित्त कर्पूर से जलाएं।

संतान प्राप्ति हेतु लक्ष्मी-नारायण पर चढ़े 5 सेब नाभि से वारकर बच्चों में बाटें।

सौभाग्य प्राप्ति हेतु लक्ष्मी-नारायण पर किशमिश चढ़ाकर गरीबो में बांटे।

आचार्य कमल नंदलाल
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