जवान रहने के लिए महज 17 साल की उम्र से सांप का जहर नसों में भर रहा है यह शख्स !!

वहीं डॉक्टर गेब्रिइल मानते हैं कि सांप का विष इंजेक्ट करने के बाद खून धमनियों में बहना बंद कर देगा और आप मर जाएंगे।

कैलिफोर्निया में रहने वाला एक शख्स का खुद को सांप के जहर का इंजेक्शन देने का अजीबोगरीब मामला सामने आया है। शख्स का नाम स्टीव लुडविन है जो पिछले 30 सालों से सांप का जहर ले रहा है। स्टीव लुडविन ने यह प्रक्रिया महज 17 साल की उम्र से शुरू की थी जो आज तक जारी है। स्टीव का कहना है कि वह जवान और फिट दिखने के लिए सांप के जहर को अपनी नसों में इंजेक्टर रहे हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि वह कम उम्र से ही सांपों के बारे में पढ़ रहे हैं। स्टीव के पास 18 सांप हैं जिनसे वह जहर निकालते हैं। वह कहते हैं कि यह दर्दनाक प्रक्रिया है और सांप को कोई नुकसान नहीं पहुंचता।

‘डेली मेल’ की रिपोर्ट के मुताबित स्टीव लुडविन कहते हैं कि 6 साल की उम्र में उन्हें एक गेटर सांप ने काट लिया था लेकिन उससे कोई नुकसान नहीं हुआ। हालांकि सांप के काटने से काफी दर्द हुआ था। स्टीव के पिता एक पायलेट हैं। वह 10 साल की उम्र में पिता के साथ मियामी गया था जहां उसने बिल हास्ट को देखा। बिल हास्ट ऐसे व्यक्ति थे जो रेटलस्नेक और कोबरा जैसे जहरीले सांपों को जहर लेते थे। हास्ट मानते थे कि जहर से शरीर को फायदा होता है। उनकी मृत्यु 100 वर्ष की आयु में हुई थी।

बिल हास्ट से मिलकर स्टीव इतना प्रभावित हुआ था कि उसने सांपों के बारे में पढ़ना शुरू कर दिया जो आज तक जारी है। स्टीव बताते हैं कि 17 साल की उम्र में उन्होंने पहली बार सांप का विष इंजेक्ट किया था, जिसकी डोज काफी कम थी। बाद में धीरे-धीरे यह डोज बढ़ा दी थी।

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स्टीव के पास कई सांप हैं जिनसे वे जहर निकालते हैं। वे कहते हैं कि ये दर्दनाक प्रक्रिया है और सांप को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। स्टीव पहले जहर को त्वचा पर रखते हैं और फिर सुई के जरिए शरीर में डालते हैं। एक टीवी शो में शामिल रहे डॉक्टर गेब्रिइल वेस्टन के मुताबिक स्टीव खुशकिस्मत हैं कि वो जिंदा हैं।

वहीं डॉक्टर गेब्रिइल मानते हैं कि इंजेक्ट के बाद खून धमनियों में बहना बंद कर देगा और आप मर जाएंगे। साथ ही स्टीव के बारे में बात करते हुए डॉक्टर गेब्रिइल वेस्टन बताते हैं कि जैसे दवाइयां हमारे शरीर पर काम करती हैं यह कुछ वैसा ही है। दवाइयां शरीर में कम स्तर पर टॉक्सिन जमा करती हैं। ये मात्रा इतनी ज्यादा नहीं होती कि शरीर को नुकसान पहुंचाए ताकि हमारा शरीर एंटीबॉडी के जरिए इनसे लड़ना सीख ले। एंटीबॉडी टॉक्सिन या वायरस से लड़ती हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक स्टीव वैज्ञानिक के साथ काम कर मनुष्यों के खून से बनी एंटीबॉडी बनाने चाहते हैं, जिसमें उनका स्टीव का खून काम आ सकता है। स्टीव बताते हैं कि अब वह खुशी खुशी मर सकते हैं क्योंकि उन्होंने जिंदगी में कुछ सकारात्मक किया है।

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