पद्मावती विवादः ‘वो नाक काटना चाहते थे, सेंसर ने ‘आई’ काटा’

महीनों तक चले विवाद, प्रदर्शनों, राजनीतिक बयानबाज़ी और फ़िल्म की रिलीज़ डेट को आगे बढ़ाए जाने के बाद आखिरकार संजय लीला भंसाली की फ़िल्म पद्मावती को सेंसर बोर्ड से हरी झंडी मिल गई है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ सेंसर बोर्ड ने फ़िल्म का नाम बदल कर ‘पद्मावत’ करने का सुझाव दिया है. सेंसर बोर्ड ने फ़िल्म के कई सीन काटने के भी आदेश दिए हैं.

अभी नहीं थमा विवाद

करणी सेना के संरक्षक लोकेन्द्र सिंह कालवी ने कहा है कि पद्मावती के वशंज और राजघराने से जुड़े 6 अन्य लोगों को भी सेंसर बोर्ड ने फ़िल्म दिखाई है, और उनकी राय जानने के बाद ही करणी सेना अपने अगले कदम पर विचार करेगी.

कालवी ने बताया कि उनकी जानकारी के मुताबिक़ तीन लोगों ने फ़िल्म पर रोक लगाने की सिफ़ारिश की थी.

कालवी ने दावा किया, “जिन तीन लोगों ने फिल्म पर रोक की सिफ़ारिश की थी उनमें मेवाड़ के पूर्व राजवंश के अरविन्द सिंह ,इतिहासकार चंद्रमणि सिंह और के के सिंह शामिल है. मेरी इन तीनों से बात हुई है. इन सभी ने फ़िल्म पर पाबंदी की राय दी है”

सोशल मीडिया पर लोगों ने ली चुटकी

सेंसर बोर्ड के फ़ैसले के बाद सोशल मीडिया में इसका चर्चा ज़ोरों पर है. ट्विटर पर लोगों ने सेंसर बोर्ड के प्रस्ताव पर भी सवाल उठाए हैं. ट्विटर पर लोगों ने हिदायत देनी शुरू कर दी कि फ़िल्म के सभी कलाकारों को अपने नाम से अंग्रेज़ी का आई अक्षर हटा लेना चाहिए.

देविका बिहानी ने लिखा – एक ‘आई’ शब्द देश के लिए इतना बड़ा मुद्दा था.

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एक फ़ेक तस्वीर भी ट्वीटर पर वायरल हो गई, जिसमें पद्मावती के पोस्टर पर दीपिका की तस्वीर के बदले रनवीर सिंह की तस्वीर लगा दी गई है.

वायकॉम 18 मोशन पिक्चर्स के बैनर तले बनने वाली फिल्म पद्मावती को लेकर पिछले कई दिनों से विवाद हो रहा है. पहले यह फ़िल्म एक दिसंबर को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली थी, लेकिन सेंसर बोर्ड ने फिल्म को यह कहकर लौटा दिया था कि बोर्ड के पास भेजे गए आवेदन में तकनीकी खामियां थी.

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि फिल्म में महारानी पद्मवाती को लेकर ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने कोशिश की जा रही है.

फ़िल्म के निर्देशक संजय लीला भंसाली ने कुछ दिन पहले एक वीडियो जारी कर फ़िल्म पर हो रहे विवाद पर स्पष्टीकरण दिया था. भंसाली ने कहा था, “मैं रानी पद्मावती की कहानी से हमेशा से प्रभावित रहा हूं. ये फ़िल्म उनकी वीरता और बलिदान को नमन करती है.

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