Lotus Temple इस मंदिर में किसी भी धर्मों के ईश्वर की प्रतिमा की स्थापना नहीं की गई है

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कमल मंदिर भारत देश में दिल्ली के कालकाजी मंदिर के पास स्थित है। यह मंदिर कमल फूल की तरह दिखने वाला बहाई उपासना का स्थल है। इसकी बनावट कमल की तरह होने के कारण ही इसको कमल मंदिर का नाम दिया गया है। इसका अन्य नाम बहाई मंदिर भी है। यह मंदिर 42 मीटर ऊँचा है और इस मंदिर के चारों ओर नौ बड़े जलाशय बनाए गए हैं, जिससे मंदिर की सौन्दर्यता बढ़ने के साथ यह जलाशय प्रार्थनागार को प्राकृतिक रूप से ठंडक प्रदान करते हैं।

यह मंदिर किसी धर्म पर आधारित नहीं है, इसलिए इस मंदिर में किसी भी धर्मों के ईश्वर की प्रतिमा की स्थापना नहीं की गई है। इस मंदिर में विभिन्न धर्मों के ग्रंथों और उनके बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए पुस्तकों का संग्रहालय उपलब्ध कराया गया है, जिससे किसी भी धर्म का व्यक्ति दुसरे धर्म से जुड़ी जिज्ञासु बातों को जान सके। इस मंदिर का वातावरण शांतिमय है, जिससे यहाँ प्राथना व ध्यान करने में सहायता मिलती है। यह मंदिर “अनेकता में एकता” के सिद्धांत को दर्शाता है।

इतिहास

इस मंदिर की बनावट को कमल की तरह बनाने के पीछे एक महत्वपूर्ण सन्देश है, भारत देश में कमल के फूल को प्यार और पवित्रता का चिन्ह माना जाता है, जो समाज को अमरत्व का सन्देश देता है, इसलिए इस मंदिर का निर्माण कमल की आकृति में ढाला गया है। कमल मंदिर को बनने में दस वर्षों का समय लगा, जिसमें 800 कर्मचारियों सहित इंजीनियर, कारीगर और टेकनीशियनों ने लगन और ईमानदारी से कार्य किया। इस मंदिर के निर्माण करने के स्थान को खरीदने के लिए मुख्य धन राशि को हैदराबाद शहर के रहने वाले अर्दिशिर रुस्तमपुर ने अपने पूरे जीवन की जमा की हुई पूँजी को इस मंदिर का निर्माण करने के प्रयोजन हेतु दान किया था। कमल मंदिर पूर्ण रूप से 13 नवम्बर सन. 1986 को बनके तैयार हुआ और इस मंदिर को आम नागरिक और पर्यटकों के लिए सन. 1986 के दिसम्बर में खोला गया।

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निर्माण कार्य

कमल मंदिर की संरचना का निर्माण यूनाइटेड किंगडम की कंपनी फ्लिंट एवं नीयल ने किया। इस मंदिर के वास्तुकार फ़रीबर्ज़ सहबा हैं, जिन्होनें इसे बनवाने में अपना सहयोग भी दिया। कमल मंदिर का निर्माण कार्य दस वर्षों में पूर्ण हुआ, जिसमें फ़रीबर्ज़ सहबा ने इसकी बनावट और परियोजना प्रबंधन के कार्य को संभाला। लगभग 800 इंजीनियर, कारीगर, टेकनीशियनों और श्रमिकों की सहायता से दुनिया का सबसे जटिल निर्माणों में से एक कमल मंदिर को दुनिया के सामने पेश किया।

पर्यटन

कमल मंदिर को देश-विदेशों से आए दर्शकों के लिए दिसबर सन. 1986 में खोला गया और सन. 2001 में कमल मंदिर ने साथ करोड़ से भी अधिक दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया। इतनी बड़ी संख्या में दर्शकों के उपलब्ध होने से यह स्थल दुनिया में सबसे अधिक देखे जाने वाले स्थलों में से एक स्थल बन गया।
दर्शक कमल मंदिर तक पहुँचने के लिए दिल्ली के कालकाजी मेट्रो स्टेशन से उतरकर पैदल कमल मंदिर तक पहुँच सकते हैं।

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