क्या आप जानते हैं Bitcoin के प्रत्येक ट्रांजैक्शन पर 240 किलोवॉट बिजली खर्च होती है

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बिटकॉइन लगातार बंपर रिटर्न देकर इन दिनों दुनियाभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए आप बिटकॉइन से जुड़े कई रोचक तथ्य जान गए होंगे। लेकिन क्या आपको यह पता है कि बिटकॉइन के पीछे एक गहरा रहस्य है और इस रहस्य के पीछे है चीन। दरअसल, चीन दुनिया का सबसे बड़ा कोयला उत्पादक देश है। वह इसी कोयले की खपत के लिए बिटकॉइन माइनिंग को जोरशोर से बढ़ावा दे रहा है। याद रखिए, पर्यावरण के लिहाज से कोयला ऊर्जा उत्पादन का सबसे ‘गंदा’ जरिया है।

चीन का ‘काला खेल’

अब यह भी जान लें कि हरेक बिटकॉइन के निर्माण और इसके ट्रांजैक्शन में भारी मात्रा में बिजली खर्च होती है। डेनमार्क के बैंक ING के मुताबिक, बिटकॉइन के प्रत्येक ट्रांजैक्शन पर 240 किलोवॉट बिजली खर्च होती है। यह एक औसत परिवार के मासिक बिजली खपत के बराबर है। चीन अपना कोयला खर्च करने के लिए बिटकॉइन माइनिंग को बढ़ावा दे रहा है। चीन के उत्तरी हिस्से में 100-100 मीटर लंबे आठ वेयरहाउसेज हैं। यहां बिटमेन टेक्नॉलजीज लि. के सर्वर प्लांट्स हैं जहां 25,000 कंप्यूटर्स बिटकॉइन जेनरेट करने में लगे हैं। इन्हें कोयले से उत्पादित बिजली का आपूर्ति ही होती है।

कुल बिजली का एक चौथाई हिस्सा चीन में खर्च

लंदन में सिटीग्रुप इंक के एक ऐनालिस्ट क्रिस्टफर चैपमेन ने बताया, ‘(बिटकॉइन) का उत्पादन बहुत गंदा हो गया है।’ चीन अपनी 60% बिजली का उत्पादन कोयले से करता है। यह दुनिया का सबसे कंप्यूटर ‘माइन्स’ ऑपरेटर है। बिटकॉइन इंडस्ट्री पर कैंब्रिज यूनिवर्सिटी की ओर से प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, दुनियाभर में सभी तरह की क्रिप्टोकरंसीज के उत्पादन में कुल बिजली का एक चौथाई हिस्सा अकेले चीन में खर्च हो रहा है।

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चीन में सबसे ज्यादा क्रिप्टोकरंसी माइनिंग पूल्स

रिसर्चरों ने इस स्टडी रिपोर्ट में कहा है कि दुनिया के 58 प्रतिशत बड़े क्रिप्टोकरंसी माइनिंग पूल्स चीन में हैं। 16 प्रतिशत के आंकड़े के साथ अमेरिका का नंबर इस लिस्ट में दूसरा है। चीन दुनिया का सबसे बड़ा कोयला उत्पादन और खपत करनेवाला देश है। इसके शिनजिआंग, अंदरूनी मंगोलिया और हिलोंगजिआन प्रांतों में स्थापित सर्वर फार्म्स कोयला उत्पादित बिजली पर ही निर्भर हैं।

159 देशों में टॉप पर बिटकॉइन निर्माता

एक अनुमान के मुताबिक, दुनियाभर की बिटकॉइन इंडस्ट्री अमेरिका के 30 लाख घरों में खपत के बराबर बिजली खर्च कर रही है। डिजिकॉनोमिस्ट बिटकॉइन एनर्जी कंसंप्शन इंडेक्स से पता चलता है कि बिटकॉइन इंडस्ट्री को एक देश मान लिया जाए तो यह बिजली खपत के मामले में दुनिया के 159 देशों से आगे है। चूंकि बिटकॉइन जेनरेशन रफ्तार पकड़ रहा है, इसलिए बिजली की खपत भी तेजी से बढ़नी तय है।

तेजी से बढ़ेगी बिजली की मांग

दरअसल, विभिन्न क्रिप्टोकरंसीज के निर्माण में ऊर्जा की खपत में अंतर होता है जो एक बड़े न्यूक्लियर रिएक्टर से उत्पादित ऊर्जा से लेकर डेनमार्क की पूरी आबादी द्वारा खपत की जा रही ऊर्जा तक हो सकती है। जानकार इस बात पर सहमत हैं कि क्रिप्टोकरंसीज इंडस्ट्री के इस्तेमाल में आनेवाली बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है। खासकर, बिटकॉइन समेत अन्य क्रिप्टोकरंसीज की कीमतों में हालिया उछाल की वजह से। अकाउंटिंग फर्म पीडब्ल्यूसी के एक युवा ब्लॉकचेन ऐनालिस्ट के मुताबिक, पिछले एक महीने में बिटकॉइन माइनिंग में ऊर्जा की खबत 30 प्रतिशत बढ़ गई है।

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यूरोप की मजबूरी का फायदा उठाता है चीन!

2013 में शुरू ऑस्ट्रिया की हाइड्रोमाइनर आईटी-सर्विसेज कंपनी GmbH अपना सर्वर हाइड्रो-पावर प्लांट्स से पैदा हुई बिजली पर रन करती है। कंपनी के फाउंडर का कहना है कि कोयले से बिटकॉइन बनाना बहुत बुरी बात है। लोग नहीं चाहते कि कोयले का इस्तेमाल हो। हालांकि, यूरोप में एक समस्या है कि यहां बिजली बहुत महंगी है।

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