कई देशों की इकॉनमी से ज्यादा हुई बिटकॉइन की कीमत

Dated 05 Dec 2017

बिटकॉइन की कीमत में अप्रत्याशित उछाल के चलते अब इसका कैपिटलाइजेशन दुनिया के कई देशों की इकॉनमी से भी अधिक हो चुका है। भारत में आरबीआई की ओर से अब भी बिटकॉइन को मान्यता नहीं मिली है, लेकिन भारत समेत दुनिया भर में यह करंसी तेजी से प्रचलन में आ रही है। यहां तक कि इसका कैपिटलाइजेशन बिल गेट्स, वॉरेन बफे और मुकेश अंबानी जैसे धनकुबेरों से भी कहीं अधिक हो गया है। बिटकॉइन करंसी की कीमत फिलहाल 190 अरब डॉलर यानी करीब 12 लाख 23 हजार 600 करोड़ रुपये है। जानें, कैसे तेजी से कई देशों की इकॉनमी से मजबूत हुआ बिटकॉइन…

वर्ल्ड बैंक के जुलाई के डेटा के मुताबिक न्यू जीलैंड की जीडीपी 185 अरब डॉलर की है, जो क्रिप्टोकरंसी के कैपिटलाइजेशन से 5 अरब डॉलर कम है। यही नहीं क्रूड ऑइल के मामले में समृद्ध कतर और कुवैत जैसे देशों की इकॉनमी भी इससे कमजोर है।

यही नहीं दुनिया भर में प्रचलित बिटकॉइन की कीमत दुनिया के दो सबसे ज्यादा पूंजी वाले बैंकों गोल्डमैन सैक्स और यूबीएस ग्रुप से ज्यादा हो गई है। गोल्डमैन सैक्स का मार्केट कैपिटलाइजेशन 97 अरब डॉलर के करीब है, जबकि यूबीएस ग्रुप का बाजार पूंजीकरण 67 अरब डॉलर है। यानी ये दोनों बैंक मिलकर भी बिटकॉइन के बराबर नहीं हैं।

भले ही कुछ वर्षों पहले तक आपने बिटकॉइन का नाम भी न सुना हो, लेकिन आज इसकी कीमत दुनिया भर में फाइटर जेट की सप्लाइ करने वाली कंपनी बोइंग से भी अधिक हो गई है। बोइंग का मार्केट कैपिटलाइजेशन 162 अरब डॉलर है, जो बिटकॉइन के मुकाबले 28 अरब डॉलर कम है।

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भारत के सबसे रईस शख्स मुकेश अंबानी की दौलत 40 अरब डॉलर है और बिटकॉइन की कीमत 190 अरब डॉलर हो चुकी है। इस लिहाज से देखें तो बिटकॉइन का कैपिटलाइजेशन मुकेश अंबानी जैसे 5 धनकुबेरों की दौलत के बराबर है। दुनिया के सबसे अमीर शख्स बिल गेट्स के पास 90 अरब डॉलर और वॉरेन बफे के पास 83 अरब डॉलर की दौलत है यानी दोनों मिलकर भी बिटकॉइन की बराबरी नहीं कर सकते।

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