देश भक्ति की मिशाल पेश करता ये गाँव , जहाँ हर रोज सुबह गाया जाता है राष्ट्रगान

आप सब भगवान को हर रोज़ याद करते होंगे.. रोज़ अपने अपने तरीके से ईश्वर की भक्ति करते होंगे. लेकिन सवाल ये है कि क्या आपने कभी अपने देश की भक्ति की है ? इसे ही देशभक्ति कहते हैं.. आप सोचिए कि हमने देशभक्ति जैसा शब्द तो बना दिया लेकिन हमारे समाज ने कभी पूरे मन से देशभक्ति नहीं की. आज हालात ये हैं कि देशभक्ति शब्द को सुनते ही.. हमारे देश के कथित रूप से सेक्युलर बुद्धिजीवयों के कान खड़े हो जाते हैं. लेकिन देशभक्ति इतनी मुश्किल नहीं है. देश की भक्ति करने में सिर्फ 52 Second का वक्त लगता है… क्या आप हर रोज़ ये 52 सेकेंड.. देश को दे सकते हैं ? ये सवाल हमने आपको आतंकित करने के लिए नहीं पूछे.. और ना ही ये कोई परीक्षा है.. आज हम Positive विचारों और देशभक्ति को बढ़ावा देने वाली एक ख़बर आपको दिखाना चाहते हैं.

तेलंगाना राज्य का एक ज़िला है करीमनगर. वहां एक गांव है.. जिसका नाम है जम्मिकुंटा. इस गांव के लोग हर रोज़ सुबह ठीक 8 बजे… सावधान मुद्रा में खड़े होकर राष्ट्रगान गाते हैं. भारत का ये छोटा सा गांव आज पूरे देश को प्रेरणा दे रहा है. इसी वर्ष 15 अगस्त के दिन से यहां इस तरह नियमित रूप से राष्ट्रगान गाने की शुरुआत हुई. आज सुबह यहां 100वीं बार राष्ट्रगान गाया गया. ये Idea जम्मिकुंटा के एक पुलिस अधिकारी का था. उन्होंने गांव के लोगों से बात करके.. सभी को राष्ट्रगान के लिए तैयार किया. जब यहां पहली बार राष्ट्रगान हुआ तो लोगों को कुछ भी समझ में नहीं आया.बहुत से लोग तो अपने काम में ही लगे रहे. जो लोग खड़े भी हुए वो सावधान मुद्रा में नहीं थे. लेकिन अब लोगों को राष्ट्रगान के नियमों की भी पूरी जानकारी हो गई है. इस पहल से वहां के लोगों के मन में देश के प्रति सम्मान बढ़ रहा है. साथ ही पुलिस और जनता के बीच का संवाद बेहतर हो गया है.

READ  आखिर क्यों आज तक लीक नहीं हुआ 'तिजोरी' में बंद है कोका कोला का 'सीक्रेट फॉर्मूला', सिर्फ दो लोगों को है जानकारी

हर रोज़ राष्ट्रगान शुरू करने की ज़िम्मेदारी Constable मोहम्मद पाशा को दी गई है. जो हर रोज़ सुबह 7:30 बजे Police Station पहुंच जाते हैं. पहले, आधे घंटे तक देशभक्ति के गीत बजते हैं इसके बाद राष्ट्रगान होता है. राष्ट्रगान का सम्मान करना सिर्फ School के बच्चों की ही जिम्मेदारी नहीं है. बहुत से लोग ऐसे होंगे जो साल में सिर्फ 2 बार… 26 जनवरी और 15 अगस्त को ही राष्ट्रगान के लिए खड़े होते होंगे. बहुत से लोग ऐसे भी होंगे जो वर्ष में एक बार भी राष्ट्रगान के लिए खड़े नहीं होते होंगे.. और राष्ट्रगान के सम्मान से जुड़े हुए Debates और बहस को बड़े चाव से देखते होंगे. कुछ लोग ऐसे भी होंगे जो केवल सिनेमा हॉल में फिल्म देखते वक़्त ही राष्ट्रगान के सम्मान में खड़े होते होंगे.. और इसके पीछे भी सिर्फ कानून का डर होगा.ऐसे तमाम लोगों को तेलंगाना के इस छोटे से गांव ने एक बहुत Positive संदेश दिया है.

किसी भी देश के नागरिकों के लिए उनका देश पूजनीय होता है… और राष्ट्रगान, देश की पूजा का सबसे बड़ा माध्यम होता है. एक दिन में 24 घंटे होते हैं. सवाल ये है कि क्या हम इन 24 घंटों में से 52 Second भी देश के लिए नहीं निकाल सकते ? ये ऐसे सवाल हैं जिन पर News Channels और Social Media पर बहस होती है. अखबारों में लेख लिखे जाते हैं. कई बुद्धिजीवी तो इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी के लिए ख़तरा भी बता देते हैं. जबकि ये बात एकदम सरल है.. आप चाहें तो अपने देश के लिए 52 Second निकाल सकते हैं.. इसमें कोई Rocket Science नहीं है… ये भावनाओं की बात है.

READ  आख़िर क्यों नहीं मिलती चंगेज़ ख़ान की कब्र ? आठ सदियों बाद भी ?

जो लोग राष्ट्रगान गाने और उसके सम्मान में खड़े होने का विरोध करते हैं उनके बारे में हमारे मीडिया में.. चैनल्स में अखबारों में ख़बरें दिखाई जाती हैं और उनकी वीरता की तारीफ की जाती है. लेकिन जब देशभक्ति और राष्ट्रगान के सम्मान से जुड़ी ऐसी positive ख़बरें आती हैं.. तो उन्हें कोई नहीं दिखाता.

Related Post