‘विकास गांडो थायो छे’ तो क्या ‘पागल विकास’ पर होगा बीजेपी-कांग्रेस का आरपार?

विकास को लेकर गुजरात पागल हो गया है, सचमुच पागल! ऐसा खुद बीजेपी और कांग्रेस का कहना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस गुजरात मॉडल के दम पर 2014 का लोकसभा चुनाव जीता और जिसे विकास का आईना कहकर बार-बार चमकाया गया, अब उसी गुजरात में कांग्रेस और बीजेपी दोनों विकास ढूंढ रही हैं। राजनीति के तरकश से निकले एक कैंपेन ‘विकास गांडो थायो छे’ (विकास पागल हो गया है) को कांग्रेस ने जमकर भुनाया है तो वहीं बदले में बीजेपी इसी विकास के नाम पर ‘आइ एम विकास, आइ एम गुजरात’ लेकर आई है।

सोशल मीडिया पर हैश टैग ‘विकास गांडो थायो छे’ खूब चल रहा है। अगस्त में एक फेसबुक पोस्ट से शुरू होकर यह हैश टैग गुजरात के ‘विकास मॉडल’ की पोल खोलता नजर आ रहा है। राज्य की खस्ताहाल सड़कों से लेकर खटारा बसों तक सब सोशल मीडिया पर पगलाए विकास के चर्चे हैं। गुजरात में भारी बारिश और फिर बाढ़ के बाद की तस्वीरें भी शेयर की जा रही हैं। इतनी ही नहीं, ट्रॉलर्स भी इस हैश टैग को लेकर खूब मजे ले रहे हैं और इससे जुड़े ‘मीम्स’ सोशल मीडिया साइट्स फेसबुक, ट्विटर और वॉट्सऐप पर भी शेयर किए जा रहे हैं। बीजेपी के 2014 में दिए गए स्लोगन ‘सबका साथ, सबका विकास’ का भी मजाक उड़ रहा है और इससे जुड़े ढेरों फेसबुक पेज और वॉट्सऐप ग्रुप बन चुके हैं।

बीजेपी के सामने गुजरात में चुनौती पेश कर रही कांग्रेस इस कैंपेन को लाने और ‘कोलावरी डी’ गाने की तर्ज पर विकास पर सवाल उठाने के बाद से ही जोश में है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी अपनी रैलियों में लोगों से पूछते दिखे, ‘गुजरात में विकास को क्या हो गया है?’ बदले में लोग जवाब देते हैं, ‘विकास पागल हो गया है!’ राहुल ने यह कहकर भी मजे लिए कि बीजेपी ने विकास को पागलखाने में डाल दिया है और उसको बाहर निकालने, इलाज करने की जरूरत है।

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दूसरी ओर, 2017 के चुनाव के लिए भी पीएम मोदी का स्टैंड ‘वंशवाद बनाम विकासवाद’ ही है। बीजेपी ने साफ कर दिया है कि वह विकास को लेकर लगाए जा रहे आरोपों से अपना बचाव नहीं करेगी। पीएम ने अपनी रैली में कहा भी है कि मुझे लगता है कि इस लड़ाई में जीत विकासवाद की होगी।

2002 गुजरात दंगों के बाद सत्ता में आए मोदी ने राज्य को विकास का पैमाना बनाकर पहले लोकसभा और फिर राज्यों के विधानसभा चुनावों में पेश किया। यही वजह है कि राज्य के विकास पर उठ रहे सवालों पर सरकार को जवाब नहीं सूझ रहा। फिलहाल बीजेपी कांग्रेस के कैंपेन के बदले ‘गुजरात मा कांग्रेस न चले’ (गुजरात में कांग्रेस नहीं चलेगी) और ‘अधिकतम गुजरात’ कैंपेन लेकर आई है।