पेशे से वकील थे नटवरलाल लेकिन ठगी में ………..नटवरलाल ! नाम ही काफी है !

हम सभी ने नटवरलाल का नाम तो जरूर सुना है लेकिन सिर्फ मुहावरों में | हमें ऐसा सोचते हैं कि ऐसा कोई चोर हो ही नहीं सकता जो पलक झपकते ही हमारी आँखों का काजल चुरा ले या ताजमहल को भी किसी भी व्यक्ति को बेच दे या जब चाहे पुलिस के चंगुल से आजाद हो जाये लेकिन हम आपको बता दे कि यह बात एक कोरी बकवास नहीं बल्कि एक बहुत ही अनूठी सच्चाई है |

आज से कई साल पहले एक चोर हुआ करता था जो ऐसी हरकतों को अंजाम दिया करता था | नटवरलाल उसका असली नाम नहीं बल्कि उसके द्वारा की गयी चोरियों में इस्तेमाल किये गए 52 नामों में से एक था | उसका असली नाम ‘मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव’ बताया जाता है | उसका जन्म बिहार के सीवान जिले के पास बंगरा गांव में हुआ था | वह पेशे से एक वकील था और ठीक-ठाक अंग्रेजी भी बोल लेता था जो लोगों को ठगने में उसके बड़े काम आती थी | उसका कहना था कि वह हमेशा पैसा ऐंठने के लिए लोगों से झूठ ही बोलता है लेकिन लोग उसकी बात को सच मानकर उसे पैसे दे देते हैं इसलिए इसमें उसकी कोई गलती नहीं है |

उसने दो-दो बार ताजमहल और लालकिला को जबकि राष्ट्रपति भवन को एक बार बेचा था | उसके द्वारा की गयी ठगी का शिकार सिर्फ आम लोग ही नहीं बनते थे बल्कि इस फेहरिस्त में कई नामचीन लोग भी शामिल थे | ऐसा माना जाता है कि उसने टाटा, अम्बानी और बिरला जैसे कई औद्योगिक हस्तियों के साथ ही कई उच्च स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों को भी ठगा था |

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ऐसा कहा जाता है कि उसे वेश बदलने और किसी के भी साइन करने में महारत हासिल थी | एक बार तो उसने भारत के राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी के साइन नकली साइन करके भी लोगों को लूटा था | उसके ठगी के मुख्य शिकार माध्यम वर्गीय सरकारी कर्मचारी और छोटे स्तर के व्यापारी हुआ करते थे |

उसे कई बार पुलिस द्वारा पकड़ा गया लेकिन हर बार जेल ले जाते समय वह किसी ना किसी तरीके से पुलिस के चंगुल से फरार हो जाया करता था | कुल मिलकर 8 राज्यों में उसके ऊपर 100 से भी अधिक ठगी के केस दर्ज थे | उसे सन 1996 में आखिरी बार ज़िंदा देखा गया था जब उसको कानपुर से दिल्ली एम्स लाया जा रहा था | दिल्ली स्टेशन आते ही उसने पुलिस के जवानों को चकमा दिया और फरार हो गया | ऐसा कहा जाता है कि अगर उसके ऊपर लगे सारे केसेस में अगर उसे सजा होती तो उसे 100 वर्ष से भी ज्यादा वक्त जेल की सलाखों के पीछे बिताना पड़ता |

उसकी मौत भी आजतक एक रहस्य ही है | सन 2009 में उसके वकील ने कोर्ट में याचिका दायर की थी क्योंकि अब जब नटवरलाल मर चुका है तब उसके ऊपर लगे सभी मामलों से उसे बरी कर दिया जाये जबकि इस मामले में नटवरलाल के भाई का कहना था कि उनकी मौत सन 1996 में ही हो चुकी है |

नटवरलाल के बारे में कहा जाता है कि उसके अंदर ऐसी कला था कि वह किसी को भी ठग सकता है | उसने एक बार कोर्टरूम में कहा था कि जजसाहब मेरे अंदर कुछ ऐसी कला है कि अगर मै आप से सिर्फ 10 मिनट बात कर लूँ तो आप वही करेंगे जो मै चाहूँगा | बहुत से लोगों ने उसके जैसा बनने की कोशिश की पर नटवरलाल जैसा फिर कोई ना बन पाया | उसके गांववालों का कहना था कि नटवरलाल एक अच्छा आदमी था जो अमीरो से धन लूट कर गरीबों में बाँटता था | गांववालों को तो ये तक कहना है कि गांव में नटवरलाल का एक स्मारक जरूर बनना चहिये |

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