‘राजकुमारी से “राष्ट्रपति” की बेटी तक को इस संस्थान’ में सिखाया जाता है “शिष्टाचार” !

शाही खानदान की शिष्टाचार स्कूल – अगर आपको यह लगता है कि साधारण लोगों को ही मैनर्स यानी एटिकेट्स सीखने की ज़रूरत होती है और बड़े घरों के बच्चों के ये विरासत में मिलता है, तो आप बिल्कुल गलत सोच रहे हैं.

जी हां, स्विट्ज़रलैंड में एक खास स्कूल है शाही खानदान की शिष्टाचार स्कूल – जहां आम लोगों को नहीं, बल्कि शाही खानदान की बेटियों को एटीकेट्स सिखाए जाते हैं.

शाही खानदान की शिष्टाचार स्कूल –

कई साल पहले तक स्विट्ज़रलैंड में ऐसे कई स्कूल थे जहां शिष्टाचार यानी एटिकेट्स सिखाया जाता था, मगर अब एकमात्र फीनिशिंग स्कूल इंस्टीट्यूट विला पिरफियू ही बचा है. यहां आज भी लड़कियों को एटीकेट्स सि‍खाएं जाते हैं. जिसमें खाने-पीने के तरीकों से लेकर, बोलचाल, चलने-फिरने और रहन-सहन का सभ्य तरीका सि‍खाना शामिल है. इंस्टीट्यूट विला पिरफियू एटीकेट्स का ऐसा आखिरी स्कूल बचा है जहां राजकुमारि‍यों से लेकर राष्ट्रपति की बेटी तक ने तहज़ीब सीखी है. इस स्कूल में एक टेबल पर आठ छात्राओं को बैठाकर चर्चा करवाते हुए इंस्ट्रक्टर के निर्देशों का पालन करने के लिए कहा जाता है.

सिखाई जाती है कई देशों की तहज़ीब

तहज़ीब की इस क्लास में वेटर स्टूडेंट्स को सर्विंग बाउल से खाना परोसना सि‍खाते हैं और ध्यान देते है कि सर्विंग बाउल टेबल की तरफ हो. साथ ही उन्हें सिखाया जाता है कि जब वेटर खाने का बाउल मुंह के पास लेकर आए तो कोहनी नीचे की तरफ रखनी है. इसी तरह की ओर भी चीजें इस स्‍कूल में सिखाईं जाती हैं. इस स्कूल में स्टूंडेंट्स को 20 अलग-अलग देशों की तहज़ीब, प्रोटोकोल और कल्चरल टैबूज को ध्यान में रखकर ट्रेनिंग दी जाती है.

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फीस जान दंग रह जाएंगे

यहां छह हफ्ते के कोर्स की फीस एग्जाम के साथ 20 लाख रुपए से भी ज़्यादा. यहां पढ़ रहीं छात्राएं 18 से 50 उम्र तक की हैं. प्रोफेशनल बिजनेस, डॉक्टर से लेकर हाउस वाइफ तक इस कोर्स को करती हैं. ब्रिटेन की स्वर्गीय राजकुमारी डायना यहां के फीनिशिंग स्कूल की छात्र रह चुकी है.

शाही खानदान की शिष्टाचार स्कूल – अब तो आप समझ ही गए होंगे कि शाही खानदान की बेटियों में इतनी नज़ाकत और तहज़ीब यूं ही नहीं आते, लाखों रुपए खर्च करके वो इसे सीखती हैं.