बेंगलुरु और जापान की मेट्रो में एक ऐसा कनेक्शन जो सब को अचम्भित करता है !

करीब डेढ़ साल पहले आपने भी यह खबर पढ़ी होगी कि जापान में सिर्फ एक बच्ची के लिए ट्रेन चलती थी। बेंगलुरू में रात की आखिरी मेट्रो भी कुछ-कुछ इसी तरह का काम करती है। बस दो हिस्सों की छोटी सी कहानी है। एक हिस्सा जापान से ताल्लुक रखता है और दूसरा अपने बेंगलुरू से। खास बात ये है कि दोनों कहानियों का संबंध ट्रेन से है।

वर्ष 2016 में जापान से निकली एक ख़बर ने पूरी दुनिया में सुर्खियां बटोरी थीं। यहां के उत्तर-पश्चिमी छोर पर स्थित होकाइदो में रेल लाइन पर एक स्टेशन था कामी-शिराटाकी। इस इलाके में ट्रेनों का संचालन करने वाली होकाइदो रेलवे कंपनी (एचआरसी) इस स्टेशन को बंद करना चाहती थी, लेकिन कर नहीं सकी, क्योंकि हाईस्कूल में पढ़ने वाली एक बच्ची इस स्टेशन का इस्तेमाल करती थी। यहां से ट्रेन पकड़कर वह स्कूल जाती थी। यकीन करना मुश्किल है, लेकिन एचआरसी पूरे सत्र में सिर्फ उसी एक बच्ची के लिए उस स्टेशन तक ट्रेन चलाती रही। फिर दो महीने बाद जब उसकी पढ़ाई पूरी हो गई, तब मार्च-2016 में उस ट्रेन और कामी-शिराटाकी स्टेशन को बंद किया गया।

जापान जैसी ही कहानी कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू की नम्मा मेट्रो की है।
हाल ही में रात के समय करीब 11-11.30 के बीच का वक़्त होगा। केम्पेगौड़ा स्टेशन से नागसंद्र की तरफ जाने वाली ग्रीन लाइन की आख़िरी मेट्रो तीन नंबर प्लेटफॉर्म से छूट चुकी थी। मंत्री मॉल स्टेशन तक पहुंच भी गई थी कि तभी उसे केम्पेगौड़ा स्टेशन वापस बुला लिया गया। वजह यह थी कि रात की उस आख़िरी ट्रेन से नियमित यात्रा करने वाले क़रीब 20 यात्री वहीं रह गए थे।

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बीएमआरसीएल (बेंगलुरू मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड) के सूत्र डेक्कन हेराल्ड से बातचीत में इसकी पुष्टि करते हैं. साथ ही बताते हैं, ‘बीएमआरसीएल ने नीति बनाई है कि रात की आख़िरी ट्रेन नियमित रूप से सफर करने वाले अपने किसी यात्री को किसी भी परिस्थिति में छोड़कर नहीं जाएगी। हर स्टेशन से वह आगे तभी बढ़ेगी जब स्टेशन नियंत्रक उसे रवाना होने की इजाज़त दे देंगे, लेकिन चूंकि ग्रीन लाइन की उस मेट्रो के ड्राइवर ने इस मामले में गलती की, लिहाजा उसे वापस लौटना पड़ा।’

अब आपको यह कहानी थोड़ी बहुत जापान जैसी लग रही होगी।