ऐसे पहचाने गर्भावस्था के प्रारंभिक लक्षण और फिर खुशिया मानाने की तयारी करे !

जब कोई महिला गर्भधारण करती है तो यह उसके जीवन का सबसे अदभुद पलों में से एक होता है। गर्भवती होने पर आपका शरीर आपको कुछ साफ संकेत भी देता है। जैसे कि गर्भवती होने पर स्तनों में थोड़ा दर्द व तनाव होता है, जिसे एक प्रारंभिक लक्षण के रूप में माना जाता है। इस लेख के माध्यम से हम आपको गर्भावस्था के कुछ ऐसे ही प्रारम्भिक लक्षणों के बारे में बता रहे हैं।

कुछ महिलाओं का मानना है, कि उन्‍हें स्‍वयं ही आभास हो जाता है कि वे गर्भवती है। लेकिन बहुत से दूसरे लोग जिनको सहज ज्ञान होता वह अन्य तरीको से बताते है कि कोई महिला गर्भवती है या नहीं। गर्भावस्था के कारण शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण स्वभाव में चिढचिढापन और थकावट महसूस होने लगती है। उलटियां और घबराहट होना, सुबह के समय कमजोरी या शरीर में ढीलापन ये लक्षण गर्भावस्था के चौथे से आठवें सप्ताह में दिखाई देने लगते हैं। गर्भधारण होने पर मासिक धर्म बंद हो जाता है, योनि स्त्राव और श्रोणि में ऐंठन होत है और स्थिति में बदलाव आता है। यदि किसी महिला को बार-बार पेशाब आता है और मासिक धर्म निर्धारित तिथि पर नही आता है तो संभवतया गर्भधारण की आशंका जताई जाती है। गर्भावस्था में त्वचा में भी परिवर्तन होने लगता है। गर्भावस्था में बनने वाले क्रोनिक गोनाडोट्रोपिन हार्मोन के कारण सुबह के समय तबियत नासाज होने लगती है। इस हार्मोन के स्तर में आमतौर पर तेजी से गिरावट गर्भावस्था की अवधि बढने (12 से 14 सप्ताह की गर्भावस्था) के बाद होती है, और उलटी आम तौर पर दूसरी तिमाही के आरंभ में आना बंद हो जाती है।

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गर्भावस्था के प्रारंभिक लक्षण  इस प्रकार से होते हैं :

मासिक धर्म का बंद होना, योनि स्राव और श्रोणि में ऐंठन की स्थिति में बदलाव आता है।

सुबह के समय कमजोरी या ढीली तबियत

स्तनों में पीङा

मतली और सुबह के समय कमजोरी या ढीलापन जोकि गर्भावस्था के चौथे से आठवें सप्ताह से शुरू होता है

 

स्वभाव में बदलाव या चिढ़चिढापन और थकावट

गर्भावस्था के कुछ अन्य प्रारंभिक लक्षण :

यदि आपके स्‍तनों में भारीपन, पीठ में दर्द आदि होते हैं तो हो सकता है कि यह गर्भावस्‍था का संकेत हो। कई बार गर्भावस्था के प्रारंभिक दिनों में महिलाओं को उनके पीरियड्स बंद होने तक पता ही नहीं चल पाता है कि वे गर्धारण कर चुकी हैं। गर्भावस्था की पुष्टी करने के लिए आप घर पर टेस्‍ट कर सकती हैं या लैब में गर्भावस्‍था परीक्षण करवा सकती हैं।

गर्भवती होने पर कई बार सांस लेने में भारीपन महसूस होता है। ऐसा इस कारण होता है क्योंकी आपके पेट में पल रहे भ्रूण को ऑक्‍सीजन की आवश्‍यकता होती है, जो वह आपसे ही लेता है। यह तकलीफ लगभग पूरी गर्भावस्‍था के दौरान रहती है, खासकर उस चरण में जब कि गर्भस्‍थ शिशु बढ़ रहा होता है और आपके फेफड़ों और डायाफ्राम पर दबाव पड़ना शुरू होता है।

गर्भावस्‍था के शुरुआती लक्षणों में सिरदर्द भी एक लक्षण है। गर्भावस्‍था में हार्मोन में परिर्वतन के कारण ही सिरदर्द होता है। अगर आप अपनी गर्भवस्था को लेकर कंफर्म हैं तो सिरदर्द दूर करने के लिए ब्रुफेन ले सकती हैं या डॉक्‍टर से सलाह भी ले सकती हैं।

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अक्सर गर्भावस्‍था के दौरान कब्‍ज होने की शिकायद भी देखा जाता है। इस दौरान पेट फूलना शुरू हो जाता है और शरीर में सूजन आ जाती है। इसके अलावा पाचन क्रिया पर भी नकारात्‍मक असर पड़ता है।

गर्भावस्‍था में आपका मूड या मिज़ाज भी बदलता रहता है। यह गर्भावस्था का एक संकेत होता है।

“महिलाएं आमतौर पर संकेतो से आसानी से पता लगा सकती है जैसे मासिक धर्म का न होना, बार बार पैशाव आना, सुबह के समय तबियत का ढीला होना, थकान, स्तनो में बदलाव, और त्वचा में परिवर्तन। यह गर्भावस्था के पता लगाने के बहुत अच्छे संकेत है।”

याद रखने की बात यह है कि इन लक्षणो मे से कोई एक भी गर्भावस्था के अलावा अन्य मामलो में कारण हो सकते है, तो वे विश्वसनीय और आसान नही है, लेकिन वे एक बहुत अच्छे संकेत है जोकि इस योग्य हो सकते है कि संदेह होने पर आप घर पर गर्भावस्था परिक्षण किट खरीद कर जांच कर सकते है या अपने स्त्रीरोग विशेषज्ञ से बात करें।

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